इंदौर: बीआरटीएस की रैलिंग हटाने को लेकर जनहित याचिका सुनवाई में आज कलेक्टर और निगम आयुक्त पेश हुए. हाईकोर्ट को दोनों अधिकारियों ने कोर्ट में एक तरफ की रेलिंग 15 में हटाने का जवाब पेश किया. हाईकोर्ट ने मामले में वकीलों की एक कमेटी भी गठित करने के आदेश दिए है.बीआरटीएस सड़क की रेलिंग हटाने में देरी और यातायात व्यवस्था बिगड़ने को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने जनहित याचिका दायर की थी.
उक्त याचिका में प्रशासन और नगर निगम की लापरवाही को आधार बनाया गया है, जिसमें शहर की जनता परेशान हो रही है. याचिका की सुनवाई में हाईकोर्ट ने कलेक्टर और निगम आयुक्त को पेशी पर तलब किया था. आज हाईकोर्ट में उक्त मामले में कलेक्टर शिवम वर्मा और निगम आयुक्त दिलीप कुमार यादव दोनों पेशी पर उपस्थित हुए. सुनवाई के दौरान जस्टिस विनोद कुमार शुक्ला और विनय कुमार द्विवेदी ने अधिकारियों से जवाब मांगा कि भोपाल में 3 दिन में बीआरटीएस हट गया था. यहां तीन महीने में भी नहीं हटाया जा सका है?
इस पर दोनों अधिकारियों ने 15 दिन में एक तरफ की रेलिंग हटाने का जवाब पेश किया. साथ ही कारण बताया कि एजेंसी तय होने में देरी के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है. अब एजेंसी तय हो गई है और तीन महीने में पूरा काम खत्म हो जाएगा. अधिकारियों के जवाब पेश करने के बावजूद हाईकोर्ट ने 5 अधिवक्ताओं की एक कमेटी बनाकर निगरानी और रिपोर्ट बनाने के आदेश भी दिए.
हाईकोर्ट द्वारा गठित अधिवक्ता कमेटी
हाईकोर्ट ने बीआरटीएस सड़क को लेकर एनएस भाटी, अजयराज गुप्ता, कौस्तुभ पाठक, जय शर्मा, प्रदुम्न किबे की कमेटी बनाई है
