जबलपुर: आज 1 दिसंबर से समर्थन मूल्य प्रदान की खरीदी शुरू हो रही है। वहीं किसानों द्वारा धान की कटाई भी लगातार जारी है। जिसको लेकर अब व्यापारी और बिचौलियों में सक्रियता बढ़ गई है। अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में रखी हुई धान को खरीदने के लिए बिचौलिये किसानों से संपर्क कर रहे हैं, जिसमें इन किसानों के पंजीयन क्रमांक के अनुसार जिस खरीदी केंद्र में धान को बेचा जाता है। वहां पर बिचौलिए अपने जुगाड़ से किसानों की धान को बेच देते हैं और धान के समर्थन मूल्य में से कुछ कमीशन किसानों से ले लेते हैं। जिसके कारण किसानों को धान का जितना मूल्य मिलना चाहिए उतना नहीं मिल पाता है।
रजिस्ट्रेशन नंबर लेकर बेचते हैं धान
अधिकतर यह देखा जाता है कि बिचौलिये किसानों से सीधे संपर्क करते हैं और उनके रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ उनकी धान को खरीद लेते हैं। यह बिचौलिये और व्यापारी समर्थन मूल्य के भाव से अपना 150 रूपये से लेकर 200 रूपए तक कमीशन काटकर धान को खरीदते हैं। जिसके बाद वह स्वयं के द्वारा धान को खेतों और गल्लों से उठाकर खरीदी केंद्र पहुंचाते हैं और वहां समितियों से सेटिंग कर किसानों से खरीदी धान को समर्थन मूल्य में बेच देते हैं। इसके बाद जब धान की राशि किसानों के खाते में ही आती है तो फिर बिचौलिया और व्यापारी किसानों से अपना कमीशन ले लेते हैं।
समितियों- वेयरहाउसों में रहती है सेटिंग
विगत वर्षों से देखा जा रहा है कि उपार्जन के समय कुछ व्यापारी केंद्रों का संचालन करते हुए पाए गए थे। वहीं जिन समितियों या महिला समूहों को खरीदी का जिम्मा दिया जाता है, उनकी जगह दूसरे व्यक्ति खरीदी करते रहते हैं। यही वजह है कि जब बिचौलिए किसानों से धान खरीदते हैं और समितियों- वेयरहाउस में अपनी सेटिंग बनाए रखते रहते हैं। जिसके चलते वह किसानों से खरीदी धान आसानी से समर्थन मूल्य पर बेच देते हैं और कमीशन पर धंधा करते रहते हैं, जबकि एक साधारण किसान को अपनी फसल बेचने में केंदों पर लंबा इंजतार करना पड़ता है।
