मध्य क्षेत्र की डायरी
दिलीप झा
प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं तो यह गंभीर मसला। डीजीपी के निर्देश के बाद भी प्रदेश के शहरों के प्रमुख चौक चौराहों पर पुलिस दिखती नहीं है। इसमें कोई दो राय नहीं कि पुलिस के सड़क पर दिखने से बदमाशों अथवा असामाजिक तत्वों में खौफ रहता है और वे आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने से डरते हैं। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि अपराधियों में पुलिस का खौफ नहीं है।
क्योंकि न हत्या रुक रही है और न ही लूटपाट। शुक्रवार को भी महू में दस लाख की लूट हो गई।पिछले शनिवार की रात भोपाल के ग्रीन पार्क कॉलोनी में बदमाशों ने पत्थरों और डंडों से हमला कर आसपास खड़े दर्जनों वाहनों में तोड़फोड़ कर दिया। हैरानी इस बात की है कि बदमाशों का लाइव वीडियो जब सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, तब जाकर की नींद खुली। इस घटना के तीन दिन बाद फिर बदमाशों ने गौतमनगर थाना क्षेत्र में वाहनों को तोड़ फोड़ कर क्षतिग्रस्त कर दिया। इस बार बदमाश सोशल मीडिया पर लाइव आकर पुलिस को खुलेआम चुनौती दे डाली कि पहले पकड़ के दिखाओ, फिर बताएंगे किसने तोड़फोड़ की।
अपराधी अगर पुलिस को चुनौतियां पेश करने लगे तो यह समझा जाता है कि पुलिस का इकबाल कमजोर हो रहा है। पुलिस की यह छबि किसी भी राज्य के लिए अच्छा संकेत नहीं माना जाता है। शासन के लिए लॉ एंड ऑर्डर एक बड़ा मसला है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। इसमें दो राय नहीं है कि नागरिक सुरक्षा की दायित्वों का निर्वहन पुलिस पर है लेकिन जब उनकी कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप कर अपनी राजनीति करने वाले हमारे माननीय अपनी मनमानी करने लगते हैं तो ईमानदारी से कर्त्तव्य निभाने वाले पुलिस अधिकारियों का मनोबल गिरने लगता है।
सूत्र यह भी बताते हैं कि प्रदेश में पुलिस प्रशासन में पारदर्शिता की भारी कमी है और यहां हो रहे भेदभाव से भी पुलिस कर्मियों का मनोबल टूट रहा है। इसलिए वे प्रसन्नचित्त भाव से काम करने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं। बुधवार रात्रि 8:15 को अचानक मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव पुलिस मुख्यालय पहुंचे और डीजीपी को निर्देश दिए कि कानून व्यवस्था को बनाए रखना हम सबकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। असामाजिक तत्वों से सख्ती से निपटने के निर्देश दिए। वहीं, बुधवार देर रात भोपाल के पुलिस कमिश्नर हरिनारायणचारी मिश्र ने भी हबीबगंज, टीटीनगर और शाहपुरा थाने का औचक निरीक्षण कर गुंडे बदमाशों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
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गुटबाजी खत्म करने में जुटे
हेमंत खंडेलवाल
हेमंत खंडेलवाल बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद से पार्टी के अंदर चल रहे घमासान को रोकने कि लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। एक तो बीजेपी में भी कांग्रेस की तरह गुटबाजी शुरू से है। लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने चाहने विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आ तो गए लेकिन पुराने बीजेपी के नेता उन्हें राज्य में अभी भी स्वीकार करने से हिचकते नजर आ रहे हैं। इसके कारण पार्टी अंदर से कमजोर होने लगी। जब यह रिपोर्ट दिल्ली हाईकमान तक पहुंची तो सांगठनिक स्तर पर पार्टी को मजबूत करने पर बल दिया गया। यही कारण है कि हेमंत खंडेलवाल आजकल बीजेपी के असंतुष्ट नेताओं से मुलाकात करने के लिए उनके घर जा रहे हैं। इस बीच गुरुवार को सांसद वीडी शर्मा ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की है और उन्हें प्रदेश के वर्तमान हालात से अवगत कराया है। राजनीतिक हलकों में इसके मायने भी निकाले जा रहे हैं। क्योंकि वीडी शर्मा, पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा और आलोक शर्मा को भी पार्टी ने बिहार चुनाव में बड़ी ज़िम्मेदारी दी थी और उन्होंने जी तोड़ मेहनत से वहां काम भी किया। मिथिलांचल के कई सीटों पर जीत दिलाने में मध्यप्रदेश के इन नेताओं की भूमिका भी अहम है।
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एसआईआर में रोड़ा अटकाने का बेमतलब प्रयास
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भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा कि एसआईआर कोई पहली बार नहीं हो रहा है। कोई प्रयास अगर राष्ट्रहित में हो रहा है तो उसका अनावश्यक विरोध अच्छी राजनीति नहीं कहीं जाती है। उन्होंने कांग्रेस से यह भी पूछा कि एसआईआर कराने वाले पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी क्या ग़लत थे। उन्होंने कहा कि एसआईआर पर चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है तो फिर जबरन विरोध का कोई मतलब नहीं होता है।
