
सीहोर। जिले में स्वास्थ्य विभाग के नियम, कानून की धज्जियां किस तरह उड़ाई जा रही हैं. यह शनिवार को एक बार फिर उस वक्त देखने को मिला जब स्वास्थ्य विभाग की गठित जांच टीम ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंची. टीम आने की भनक लगते ही अप्रशिक्षित डॉक्टर अवैध क्लीनिक बंद कर भाग गए तो एक जगह बिना डिग्रीधारी बच्चों से लेकर बड़ों तक का इलाज करते मिला. उसे फटकार लगाकर क्लीनिक का सील कर बंद करा दिया है.
गौरतलब है कि जिले भर में झोलाछाप डॉक्टरों द्वारा मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ किया जा रहा है. दीवाली के दौरान ग्राम कोठरी के एक झोलाछाप डॉक्टर के गलत उपचार से एक परिवार के दो मासूम बच्चों की जिंदगी पर विराम लगने के बाद भी झोलाछाप डॉक्टरों की क्लीनिकों पर मरीजों की भीड़ बनी हुई है. इसी तारतम्य में आष्टा क्षेत्र में लगातार हर कहीं बिना परमिशन के क्लीनिक खोलकर मरीजों का इलाज करने की स्वास्थ्य विभाग को शिकायत मिल रही थी. शिकायत को सीएमएचओ डॉ. सुधीर कुमार डहेरिया ने गंभीरता से लेते हुए जांच करने छह सदस्यीय टीम बनाई. टीम में बीएमओ डॉक्टर अमित माथुर, सिविल अस्पताल के सर्जिकल स्पेस्लिस्ट डॉ. भूपेंद्र परमार, निश्चेतना विशेयज्ञ डॉ. जयदीप सिसोदिया, सहायक अस्पताल प्रबंधक जितेंद्र वर्मा, बीइई मोहन श्रीवास्तव, नेत्र चिकित्सा सहायक डॉ. सुरेश सेन को शामिल किया. जांच दल शनिवार को क्षेत्र के सिद्धिकगंज में जांच करने पहुंचा तो वहां चौंकाने वाले नजारे देखने को मिले. हालांकि उनके आने की खबर गांव में पहले ही पहुंचने से कई क्लीनिक बंद हो गए थे.
लताड़ लगाते हुए बंद कराया क्लीनिक
शनिवार को टीम सिद्दीकगंज में अमित विश्वास के क्लीनिक पर पहुंची. यहां बच्चों और बड़ों का इलाज होता मिला. टीम ने पूछताछ की तो विश्वास के पास डिग्री और न ही कोई अन्य परमिशन मिली. फटकार लगाकर क्लीनिक को बंद कर दिया. यहीं पर टीम डॉ. भगवान सिंह गुर्जर के निवास स्थान में संचालित क्लीनिक पहुंची, लेकिन वह पहले ही ताला लगाकर गायब हो गए. टीम ने मौके से कॉल किया तो रिसीव नहीं किया, फिर सिद्दीकगंज थाने से पुलिस बुलाकर वापस कॉल किया तो मोबाइल ही बंद कर लिया. जिसके चलते कोई कार्रवाई नहीं हो सकी.
झोलाछाप डॉक्टरों में मचा हड़कंप, हुए नदारद
सिद्दीकगंज क्षेत्र में टीम के कार्रवाई पहुंचने की अधिकांश अवैध क्लीनिक खोलकर इलाज करने वालों को लगी तो वह ताला लगाकर भाग खड़े हुए। बताया जाता है कि जो मरीज क्लीनिक पर पहुंचे उनको भी वापस लौटा दिया गया। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि जिनके पास जो डिग्री है उसी पद्धति से इलाज करने को कहा गया है, यदि दूसरी पद्धति से और बगैर लाइसेंस से उपचार करते मिले तो कार्रवाई होगी. फिलहाल तो स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई ने क्षेत्र के झोलाछाप डॉक्टरों में हड़कंप का माहौल निर्मित कर दिया है.
छापामार कार्रवाई सतत जारी रहेगी
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के निर्देशानुसार गठित टीम द्वारा शनिवार को सिद्धिकगंज क्षेत्र में निजी क्लीनिकों की जांच की गई. यहां पर एक क्लीनिक पर मौजूद डॉक्टर के पास कोई पात्र डिग्री नहीं मिली, जबकि वह एलोपैथी पद्धति से बच्चों और बड़ों का इलाज कर रहा था. इस क्लीनिक को बंद करा दिया गया है. इसी तरह एक जगह हमारे पहुंचने से पहले ही डॉक्टर क्लीनिक बंद कर गायब हो गया था.
डॉ. अमित माथुर , बीमएओ आष्टा
