
ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने निलंबित तहसीलदार शत्रुघन सिंह चौहान की याचिका पर सुनवाई करते हुए एफआईआर निरस्त करने के आवेदन को स्वीकार कर लिया है। कोर्ट ने आदेश दिया कि दुष्कर्म के मामले को निरस्त किया जाए। महिला थाना ग्वालियर में एक महिला ने तत्कालीन तहसीलदार शत्रुघन सिंह के खिलाफ 15 जनवरी 2025 को शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था।
इस मामले में लगातार फरार रहने वाले निलंबित तहसीलदार ने सुप्रीम कोर्ट से अग्रिम जमानत निरस्त होने के बाद 30 जून को ग्वालियर जिला कोर्ट में सरेंडर किया था। मामले में अब निलंबित तहसीलदार की याचिका पर दुष्कर्म की एफआईआर निरस्त करने के आदेश कोर्ट ने दिए हैं।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को सुना और कहा कि इस केस में घटनाओं का क्रम और उनकी टाइमिंग देखकर ये प्रतीत होता है कि निजी दुश्मनी या फिर बदला लेने के उद्देश्य से एफआईआर दर्ज कराई गई है। ऐसे में प्रकरण की ट्रायल को जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग जैसा होगा। आरोपी की ओर से पैरवी करते हुए पूर्व अतिरिक्त महाधिवक्ता राजीव शर्मा ने तर्क दिया है कि पीड़िता ने एक अन्य मामले में स्वयं को 2010 से 2020 के बीच अमित यादव की पत्नी बताया। 2014 में उसके बेटे को जन्म देना बताया। पीड़िता के एक ही बेटा है और इसके अलावा उसके कोई संतान नहीं है। बाद में आरोप लगाया कि 2014 में जन्म लेने वाले बेटे का पिता आरोपी शत्रुघन सिंह चौहान है।
*तहसीलदार के पक्ष ने यह रखीं दलीलें…*
जब पीड़िता ने 2014 में केवल एक ही बालक को जन्म दिया और उसके कोई दूसरा बच्चा नहीं है तो फिर वह उसके जैविक पिता के रूप में दो लोगों के नाम कैसे ले सकती है। ये संभव नहीं कि एक बच्चे के दो-दो जैविक पिता हों। वहीं, पीड़िता की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ जो भी आरोप लगाए गए हैं, वो जांच की विषय वस्तु हैं। आरोपी के अनुसार, पीड़िता पहले ही शादीशुदा है और उसके एक बच्चा भी है। इन तमाम बिंदुओं पर जांच होने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
