ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे
“मैं, ग्वालियर जिले की कलेक्टर रुचिका चौहान हूं, क्या आपको गणना पत्रक मिला है। यदि मिला है तो उसे भरकर बीएलओ को वापस करें।” एसआईआर अभियान के दौरान ग्वालियर कलेक्टर रुचिका चौहान कुछ इसी अंदाज में लोगों के घरों पर दस्तक दे रही हैं। बीएलओ और आम जनता, दोनों की ही परेशानियों से बखूबी वाकिफ हैं कलेक्टर साहिबा। काम के दवाब के चलते बीएलओ तनाव के शिकार न हों और ईएफ डिजिटलाइज्ड का काम भी निर्धारित अवधि तक पूर्ण हो जाए, इस पर कलेक्टर का खास ध्यान है।
कलेक्टर कभी केआरजी कॉलेज पहुंचकर यहां देर रात तक चल रहे ईएफ के संग्रहण व डिजिटलाइजेशन कार्य की अपडेट स्थिति की जानकारी लेती हैं और फिर बीएलओ की पूरी टीम को आपनी तरफ से समौसे खिलाती हैं। इतना ही नहीं, बीएलओ में जोशे जज्बा बनाए रखने के लिए ग्वालियर का जिला प्रशासन कई इनामी स्कीम लेकर भी आया है, मसलन श्रेष्ठ कार्य करने वाले बीएलओ को पर्यटन विभाग के होटल तानसेन में सपरिवार भोजन के कूपन प्रदान किए जा रहे हैं।
इस हौंसला अफजाई ने ग्वालियर में एसआईआर को रफ्तार दी है, यही वजह है कि ग्वालियर जिले में अभी तक 55 प्रतिशत से ज्यादा गणना पत्रक डिजिटाइज्ड किए जा चुके हैं। ग्वालियर जिले में जिन बीएलओ ने अपने-अपने क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर समय रहते अपना सम्पूर्ण कार्य शतप्रतिशत पूर्ण कर लिया है उन्हें कलेक्टर साहिबा ने अपने दफ्तर बुलाकर सम्मानित कर उनके उत्कृष्ट कार्य के लिये उनकी तारीफ कर हौंसला बढ़ाया। सूबे के तमाम जिलों से जहां काम के बोझ तले दबे बीएलओ के बीमार पड़ने और अस्पतालों में भर्ती होने की खबरें मिल रही हैं वहीं ग्वालियर अंचल में फिलवक्त सब कुछ ठिकाने पर है।
रामलला के बाद कृष्णलला… बागेश्वर बाबा ने दे दिए संकेत
अयोध्या में रामलला के मंदिर निर्माण के बाद साधु संतों, संघ और भाजपा का अगला मिशन क्या मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा हो सकता है। बागेश्वर बाबा संकेत तो कुछ ऐसे ही दे रहे हैं। शिवपुरी में चल रही कथा में बागेश्वर बाबा ने यह नारा भी लगा दिया, “कृष्ण लला हम आएंगे, माखन मिश्री खाएंगे, जिन्हें दिक्कत हो वो खिसक लें।” उनके इस वक्तव्य को मथुरा जन्मभूमि विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है। बागेश्वर बाबा ने हाल ही में दिल्ली से वृंदावन तक पदयात्रा भी की थी। ये संकेत बता रहे हैं कि 29 के चुनाव से पहले साधु संत मथुरा जन्मभूमि विवाद को लेकर बड़ा आंदोलन खड़ा कर सकते हैं। वैसे यह मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है और भाजपा ने आधिकारिक तौर पर इस मसले पर अभी कोई टिप्पणी नहीं की है लेकिन साधु संत खुलकर अपनी राय रखने में जुटे हैं।
महिला और युवा मोर्चा हाथ से निकले, अब माइनॉरिटी पर नजर
कमल दल में नौजवानों और महिलाओं के मोर्चों की कमान हासिल करने में ग्वालियर चंबल और बुंदेलखंड को नाकामी मिली और यहां से उभरी दावेदारियों को नकारकर पार्टी नेतृत्व ने महाकौशल और मालवा को तरजीह दी। बहरहाल, ग्वालियर वालों ने अब माइनॉरिटी सैल के लिए ताकत लगा दी है। मोर्चा संगठनों के अध्यक्ष तय करते समय पार्टी ने माइनॉरिटी सैल को होल्ड पर रखा है, बस यहीं से ग्वालियर की उम्मीदें शुरू हो गईं। शिवराज सरकार के दौर में मदरसा बोर्ड संभाल चुके नियाज़ मौहम्मद और कई बड़ी कमेटियों में रह चुके एड. शिराज कुरैशी के नाम चले तो लंबे समय से भाजपा से जुड़े सईद सिंधिया ने अपने दामाद सादिक खान मेव का नाम आगे बढ़ाया है। माइनॉरिटी सैल के कौमी सदर के बीते रोज उनकी कटोराताल कोठी पर तशरीफ लाने और वहां हुए जोरदार इस्तकबाल से इन अटकलों को और बल मिला। ग्वालियर चंबल अंचल में मुस्लिम, सिख और ईसाई आबादी की बहुलता के आंकड़े बताते हुए माइनॉरिटी सैल की सदारत के लिए ग्वालियर की दावेदारी पेश की गई है।
मेला में सिर्फ एक महीना बाकी, तैयारी सिफर
सवासौ साल का शानदार अतीत रखने वाले ग्वालियर व्यापार मेला के इस वर्ष के आयोजन में आज से सिर्फ एक महीना बचा है लेकिन जमीन पर तैयारियां सिफर नजर आ रही हैं। दुकानों के ऑनलाइन आवेदन की आज आखिरी तारीख थी लेकिन अभी भी सभी दुकानदारों के आवेदन नहीं हो सके हैं। अपनी दुकानें ब्लैक में बेचने वाले तीन दुकानदारों को ब्लैकलिस्टेड भी किया गया है। मेला प्राधिकरण में राजनीतिक नियुक्तियों की उम्मीद पहले ही खत्म हो चुकी थी और पिछले छह साल की तरह इस बार भी अफसरान ही मेला लगा रहे हैं। मेला प्राधिकरण और व्यापारी संघ के बीच तनातनी खत्म होने का नाम नहीं ले रही, इसका असर मेला की तैयारी पर साफ दिख रहा है।
