महंगाई, जीडीपी, औद्योगिकी उत्पादन सूचकांक के नये आधार वर्ष पर पहली प्री-रिलीज कार्यशाला सम्पन्न

मुंबई, (वार्ता) सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), उपभोक्त मूल्य सूचकांक (सीपीआई) और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आधार वर्ष में किये जाने वाले परिवर्तन को सार्वजनिक रूप से जारी किये जाने से पहले इस पर परामर्श के लिए बुधवार को पहली कार्यशाला का आयोजन किया गया। वर्तमान में जीडीपी, सीपीआई और आईआईपी की वर्तमान श्रंखला 2011-12 के मूल्यों को ( 100 आधार अंक) आधार मान कर शुरू की गयी है।

कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की बुधवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार नियमित रूप से जारी किये जाने वाले इन सूचकांकों के संशोधित आधार वर्ष पर आधारित नये आंकड़ों की श्रृंखला अगले वर्ष जारी की जानी है। इस कार्यशला का उद्येश्य उससे पहले प्रस्तावित संशोधनों के बारे में चुनिंदा हितधारकों को उसकी जानकारी देना था।

इस कार्यशाला में अंतरराष्ट्रीय संगठनों, भारतीय रिजर्व बैंक, केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ कई जाने-माने अर्थशास्त्रियों, वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों, शिक्षा क्षेत्र के लोग, सांख्यिकी विद् सहित लगभग 160 लोगों ने भाग लिया।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के चेयरमैन प्रो. एस. महेंद्र देव, रिजर्व बैंक की डिप्टी गवर्नर डॉ. पूनम गुप्ता, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के सचिव डॉ. सौरभ गर्ग, और महानिदेशक (केंद्रीय सांख्यिकी) ने एन. के. संतोषी ने संबोधित किया।

श्री संतोषी ने स्वागत भाषण में आधार वर्ष में संशोधन और तरीके में बदलाव और इन सूचकांकों में में इस्तेमाल होने वाले डेटा के बारे में जानकारी दी।

डॉ. गर्ग ने अपने कहा कि देश में डेटा से संचालित नीति निर्माण के लिए मंत्रालय लगातार अच्छी गुणवत्ता के और सही-सटीक डेटा देने की लगातार कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि ‘विकास के लिए डाटा’ और विकसित भारत 2047 की सोच के साथ,मंत्रालय राष्ट्रीय सांख्यिकीय प्रणाली को को मज़बूत करने में लगा है।

इसके लिए मुख्य रूप से आठ सिद्धांतों पर काम किया जा रहा है, जिसमें समयावधि, बारंबारिता में वृद्धि, सूचनाओं का विन्यास , विस्तार , नवीनतम प्रौद्योगिकी का प्रयोग, प्रशासनिक आंकड़ों को इष्टतम करना , देश में उपलब्ध अलग-अलग डेटासेट का तालमेल और बेहतर प्रसार शामिल है।

डॉ. पूनम गुप्ता ने भारतीय अर्थव्यवस्था संबंधी डेटाबेस (डीबीआईई) को मज़बूत करने, समयावधि के विस्तार और सर्वे प्रणाली को विस्तृत करने के लिए आरबीआई की पहलों पर प्रकाश डाला।

प्रो. महेंद्र देव ने उद्घाटन भाषण में भरोसेमंद और नवीनतम डॉटा, असंगठित क्षेत्र के बारे में बेहतर आकलन और जीएसटीएन, लोक वित्त प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) और एनपीसीआई (नेशनल पेमेंट कार्पोरेशन ऑफ इंडिया) सिस्टम जैसे डिजिटल और एडमिनिस्ट्रेटिव डेटा सोर्स के इंटीग्रेशन के महत्व पर ज़ोर दिया।

 

 

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