
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक खोत की एकलपीठ ने अर्जित अवकाश की राशि का नब्बें दिनों में भुगतान करने के निर्देश दिये है। उक्त निर्देश के साथ ही न्यायालय ने मामले का पटाक्षेप कर दिया।
दरअसल यह मामला याचिकाकर्ता दमोह की जबेरा तहसील अंतर्गत ग्राम सिंहपुर निवासी घनश्याम सिंह की ओर से दायर किया गया था। जिसमें कहा गया कि उनकी नियुक्ति 13 नवंबर 1969 को सहायक शिक्षक के पद पर हुई थी। 1987 में शिक्षक व 1997 में अध्यापक के पद पर पदोन्नत हुआ। 2013 में सेवानिवृत्त हो गया। लेकिन उसे अर्जित अवकाश की राशि का भुगतान नहीं किया गया। अभ्यावेदन का कोई नतीजा नहीं निकला, जिस पर हाईकोर्ट की शरण ली गई। पूर्व में हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के हक में आदेश पारित किया था, लेकिन उसका पालन नही किया गया। जिला शिक्षा अधिकारी ने अभ्यावेदन इस आधार पर निरस्त कर दिया कि सर्विस बुक में 211 दिन दर्ज हैं, लेकिन प्रमाण पत्र नहीं है। तत्कालीन संकुल प्राचार्य सेवानिवृत्त हो चुके हैं, इसलिए भुगतान नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने पूरे मामले पर गौर करने के बाद स्पष्ट किया कि प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है, सर्विस बुक में दर्ज दिनों की अर्जित अवकाश राशि नब्बें दिन में प्रदान कर दी जाए।
