
ग्वालियर। मदनमोहन मंदिर मुरार में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन शुक्रवार को कथावाचक आचार्य सतीश कौशिक महाराज ने ध्रुव चरित्र एवं प्रहलाद चरित्र की कथा का भक्तों को रसास्वादन कराया। कथा के प्रसंग सुन श्रद्धालु मंत्रमुग्ध हो गए। कथा से पहले वैदिक मंत्रोच्चार के साथ परीक्षित डॉ राम अवतार दुबे श्रीमती राजकुमारी दुबे द्वारा पूजा-अर्चना की गई। भागवत कथा में महाराज ने कहा कि भारत देव भूमि है। यहां किसी भी मानव का जन्म अपना कल्याण कर लेने यानी जन्म-मृत्यु के चक्कर से छुटकारा पाने के लिए होता है। लेकिन, माया के वश में आकर हम सब अपना मूल कार्य को भूल कर संसारिक भोग-विलास आदि में फंस जाते हैं। इस कारण परेशानी होती है। कथावाचक ने कहा कि श्रीमद्भागवत में प्रह्लाद व ध्रुव का चरित्र युवाओं को अपनाने के लिए एक अदभुत प्रकरण है।
इस मौके पर आचार्य सतीश कौशिक ने ध्रुव चरित्र का वर्णन करते हुए कहा कि जीव जब सुनीति की उपेक्षा कर अपनी रुचि के अनुरूप आचरण करता है तो वह धर्म व न्याय के मार्ग से भटक जाता है। ऐसे में सिर्फ मां ही अपनी संतान को सन्मार्ग पर चलने का मार्ग प्रशस्त करती है। उन्होने कहा कि राजा उत्तानपाद ने अपनी रानी सुरूचि के कहने पर बालक ध्रुव का जब तिरस्कार किया तो मां सुनीति ने अपने पुत्र को ब्रम्ह की शरण में जाने की राह दिखाई। उस पर चलकर बालक ध्रुव ने भगवान का साक्षात्कार करने के साथ ही परम पद को प्राप्त कर लिया। उन्होने कथा के माध्यम से सभी महिलाओं को अपने पुत्रों को सन्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया। जबकि प्रहलाद चरित्र का वर्णन करते हुए उन्होंने कहा कि समर्पण के साथ भगवान की भक्ति में लीन होने वाले जीव की रक्षा के लिए श्री हरि हर समय तत्पर रहते हैं। उन्होने कहा कि हिरण्यकश्यप ने बालक प्रहलाद को मारने के तमाम उपाय किए लेकिन हर जगह भगवान ने उनकी रक्षा की। और अंत में नृसिह के रूप में अवतरित होकर हिरण्य कश्यप का वध कर दिया। इस प्रसंग को सुनते ही श्रोताओं के जयकारों से पंडाल गूंज उठा।
इस मौके पर आयोजन समिति के कमल तिवारी, सतेन्द्र कटारे, महेन्द्र समाधिया, अमरीश शर्मा, भीम चौहान,सहसराम, ओमप्रकाश, बाबूलाल, रामशंकर दुबे, रामनिवास, सुरेश, रामनरेश, डॉ विशम्भर, रामदेव आदि लोग मौजूद रहे।
