
भोपाल: कांग्रेस के एक प्रतिनिधि मंडल ने शुक्रवार को मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव झा को ज्ञापन सौंपकर आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्य खुले तौर पर सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का उपयोग कर वोट खरीदने और चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन कर रहे हैं।
प्रतिनिधि मंडल में पूर्व मंत्री पी.सी. शर्मा, भोपाल शहर कांग्रेस अध्यक्ष प्रवीण सक्सेना, वरिष्ठ नेता जे.पी. धनोपिया, शाबिस्ता जाकी, प्रदेश प्रवक्ता भूपेंद्र गुप्ता, अभिनव बरोलिया, पार्षद गुड्डू चौहान, मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रभारी ललित सेन तथा सदस्य रमेश पांडे और निकेश चौहान शामिल थे।
ज्ञापन के अनुसार, बिहार चुनाव के दौरान “जीविका दीदी” पहल के तहत स्वयं सहायता समूह की महिलाओं और 18 से 60 वर्ष की विवाहित महिलाओं को “इज्जत धन” शीर्षक से लगभग 130 करोड़ रुपये उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किए गए। प्रत्येक महिला को 10,000 रुपये दिए गए, जबकि उस समय चुनाव आचार संहिता प्रभावी थी। कांग्रेस का कहना है कि यह कदम चुनाव परिणाम को प्रभावित करने की मंशा से उठाया गया था। प्रतिनिधि मंडल ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सहित अन्य भाजपा शासित राज्यों में भी ऐसे ही कदम उठाकर चुनाव आयोग को खुली चुनौती दी जा रही है।
प्रतिनिधि मंडल ने यह भी कहा कि पहले चुनाव की घोषणा से छह माह पहले तक सरकारों और राजनीतिक दलों को नई घोषणाएँ करने से रोका जाता था, लेकिन अब यह अवधि घटाकर तीन माह कर दी गई है, जिसका भाजपा सरकारें दुरुपयोग कर रही हैं। उन्होंने मध्यप्रदेश में 2023 के चुनाव से पहले शुरू की गई “लाड़ली बहना योजना” को भी वोट प्रभावित करने का उदाहरण बताया।
कांग्रेस ने मांग की कि चुनाव आयोग तुरंत केंद्र और सभी राज्य सरकारों को निर्देशित करे कि चुनाव अवधि में किसी भी प्रकार की नई राशि वितरण या कल्याणकारी घोषणाओं पर रोक लगाई जाए। साथ ही, जिन राज्यों में चुनाव घोषित हैं या निकट भविष्य में होने वाले हैं, वहाँ चल रही योजनाओं की स्वतंत्र जांच कराई जाए, सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, आर्थिक प्रलोभनों पर कड़ी निगरानी रखी जाए और मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान BLO की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए।
