
नई दिल्ली, 20 नवंबर 2025: लगातार बढ़ रहे हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने अब सीधे दखल देने का फैसला किया है। प्रीमियम की इस बेतहाशा बढ़ोतरी को रोकने के लिए सरकार ने बीमा रेगुलेटर (IRDAI), इंडस्ट्री के बड़े अधिकारियों और हॉस्पिटल ग्रुप्स के साथ बातचीत शुरू कर दी है। सरकार बीमा कंपनियों पर प्रीमियम की एक अधिकतम सीमा (Cap) तय करने का विचार कर रही है, ताकि वे मनमाने ढंग से प्रीमियम न बढ़ा सकें।
लागत कम करने और पारदर्शिता पर जोर
प्रीमियम पर नियंत्रण के लिए सरकार चाहती है कि बीमा कंपनियां अपने मैनेजमेंट के खर्चों को कम करें, जिसके तहत एजेंटों को दिए जाने वाले कमीशन की एक सीमा तय की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, डिस्क्लोजर नियमों को सख्त किया जाएगा ताकि ग्राहकों को पॉलिसी की पूरी और सही जानकारी मिल सके। सरकार इस बात पर भी नजर रखे हुए है कि GST कटौती का फायदा पॉलिसीधारकों को मिल रहा है या नहीं।
मेडिकल महंगाई और क्लेम सेटलमेंट में सुधार
प्रीमियम महंगा होने के पीछे इलाज का तेजी से बढ़ता खर्च और अस्पतालों द्वारा जरूरत से ज्यादा बिल बनाने का आरोप है। भारत में मेडिकल महंगाई 2026 में 11.5% तक बढ़ने का अनुमान है। क्लेम सेटलमेंट में देरी और गड़बड़ियों को रोकने के लिए, सरकार ‘नैशनल हेल्थ क्लेम्स एक्सचेंज’ को बढ़ावा दे रही है, जिसका लक्ष्य क्लेम के पूरे प्रोसेस को डिजिटल, तेज और आसान बनाना है।
