गुना: ग्रामीण अंचल में शिक्षा के नाम पर चल रहे निजी विद्यालयों की मनमानी और शिक्षा विभाग की अनदेखी अब मुसीबत बनती जा रही है। फतेहगढ़ क्षेत्र में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इन विद्यालयों में न तो ज़रूरी सुविधाएँ हैं, न सुरक्षित भवन। मासूम छात्रों को प्रतिदिन जान जोखिम में डालकर लोडिंग वाहनों और ऑटो रिक्शा में ढोया जा रहा है।
सुविधाओं का घोर अभाव, फिर भी मान्यता मेहरबान
नव भारत की पड़ताल में फतेहगढ़ में चार ऐसे निजी विद्यालय सामने आए हैं, जिनमें खेल ग्राउंड तक नहीं है। भवन के नाम पर चार-पाँच कमरों में माध्यमिक स्तर तक की कक्षाएँ संचालित की जा रही हैं। 10 से 15 किमी दूर से आने वाले बच्चों को इन जर्जर ढाँचों में ज्ञान दिया जा रहा है। सबसे गंभीर विषय है छात्रों का असुरक्षित परिवहन। छोटे ऑटो रिक्शा और माल ढोने वाले लोडिंग वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चों को भरकर लाने-ले जाने का यह ख़तरनाक सिलसिला बेखौफ जारी है। यह सीधे-सीधे बच्चों की सुरक्षा और सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों का उल्लंघन है।
जब संवाददाता ने छबड़ा चौराहे पर एक ऑटो रिक्शा में ठुंसे हुए 15-20 बच्चों की तस्वीरें लीं और हकीकत जाननी चाही, तो स्कूल संचालक भडक़ उठे। उन्होंने फोन पर संवाददाता को धमकाते हुए कहा कि वह 15 साल से स्कूल चला रहे हैं और मेरे पास आए कोई अधिकारी फिर देखता हूँ। संचालक की यह दबंगई बताती है कि शिक्षा विभाग इन पर कितना मेहरबान है।
