यूनुस सरकार भारत के साथ अवामी लीग के संबंधों को कभी नहीं समझ सकती: मोहम्मद अराफात

ढाका, 19 नवंबर (वार्ता) अवामी लीग के वरिष्ठ नेता एवं बंगलादेश के पूर्व सूचना एवं प्रसारण मंत्री मोहम्मद अली अराफात ने मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि इस्लामी चरमपंथियों द्वारा समर्थित अंतरिम सरकार कभी भी अवामी लीग के भारत के साथ संबंधों की महराई को नहीं समझ सकती।

उनकी यह टिप्पणी देश के घरेलू अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) द्वारा 17 नवंबर के फैसले के मद्देनजर आई है, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को जुलाई 2024 के विद्रोह के दौरान कथित मानवता के खिलाफ अपराध के लिए फांसी की सजा सुनाई गई है।

न्यायाधिकरण ने पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल और वर्तमान में जेल में बंद पूर्व पुलिस प्रमुख चौधरी अब्दुल्ला अल-मामून को भी मृत्युदंड की सजा सुनाई है जो क्षमादान के बदले में सरकारी गवाह बन गए थे और उनकी सजा घटाकर पांच साल कर दी गई है।

सोमवार को ढाका ने औपचारिक रूप से भारतीय अधिकारियों से सुश्री हसीना और श्री कमाल दोनों को तुरंत वापस भेजने का अनुरोध किया और कहा कि नयी दिल्ली संधि के तहत अपने दायित्वों का पालन करने के लिए बाध्य है। पूर्व प्रधानमंत्री अपनी सरकार के पतन के बाद पांच अगस्त, 2024 से भारत में रह रही हैं।

आईसीटी के फैसले और सरकार की मांग पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए श्री अराफात ने कहा कि अंतरिम प्रशासन के पास भारत के साथ बंगलादेश की दीर्घकालिक साझेदारी को समझने के लिए राजनीतिक या ऐतिहासिक आधार का अभाव है।

उन्होंने लिखा, “भारत के साथ हमारे संबंध केवल 1971 पर ही आधारित नहीं हैं बल्कि घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी समूहों से संयुक्त रूप से मुकाबला करने सहित कई मोर्चों पर हमारे आपसी हितों पर भी आधारित हैं।”

प्रधानमंत्री हसीना के नेतृत्व में प्राप्त उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने ढाका द्वारा भूमि सीमा समझौते पर हस्ताक्षर करने, सम्मानजनक एवं रचनात्मक सहयोग के माध्यम से समुद्री सीमा विवाद का समाधान तथा संपर्क और ऊर्जा सहयोग को मजबूत करने की ओर ध्यान आकर्षित किया।

श्री अराफात ने इस बात पर बल दिया कि अवामी लीग की विदेश नीति का दृष्टिकोण 1971 के मुक्ति संग्राम की भावना पर आधारित है जो बंगलादेश की स्वतंत्रता में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका के संदर्भ में है न कि पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान के सुरक्षा सिद्धांतों पर।

उन्होंने लिखा, “1971 के परिप्रेक्ष्य में सहयोग एवं सहभागिता पर आधारित कूटनीति हमेशा समस्याओं को सुलझाने और दोनों देशों के लोगों की भलाई में सुधार लाने में मदद करेगी, जैसा कि शेख हसीना के शासनकाल में सकारात्मक रूप से हुआ था।”

उन्होंने कहा, इसके विपरीत, पाकिस्तान सैन्य प्रतिष्ठान की सिफारिशों से निर्मित भारत के साथ कूटनीति से केवल पारस्परिक नुकसान ही होगा और अंततः नुकसान जनता को ही होगा।

प्रधानमंत्री हसीना के कूटनीतिक रुख का वर्णन करने के लिए “खेल सिद्धांत” का हवाला देते हुए, श्री अराफात ने तर्क दिया कि अवामी लीग के दृष्टिकोण से दोनों पक्षों को लाभ हुआ जिसे वर्तमान अंतरिम सरकार पहचानने में असमर्थ है।

 

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