ग्वालियर:शहर से लगभग 20 किलोमीटर दूर मालनपुर के नज़दीक व मुरैना जिला क्षेत्र में 180 बच्चों और 20 शिक्षकों को यूथ हॉस्टल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने चार किलोमीटर की ट्रैकिंग कराई। नरेश्वर 8वीं से 12वीं शताब्दी के दौरान गुर्जर प्रतिहार शासको द्वारा नागर शैली में निर्मित अपने खूबसूरत मंदिरों के लिए जाना जाता है। पहाड़ के तीन किनारों पर अभी भी लगभग 21 मंदिर खड़े है।
पहाड़ पर एक भव्य तालाब है जिसमें सीढिय़ां हैं जो मंदिरों से घिरी हुई हैं। बरसात के दिनों में तालाबों से गिरने वाले झरने का पानी शिवलिंग को छूकर निकल जाता है। यहां पर शिव और हनुमान जैसे विभिन्न देवताओं की मूर्तियां हैं।ग्वालियर से सभी छात्र-छात्राएं अपने शिक्षकों के साथ स्कूल बस से नरेश्वर के लिए रवाना हुए। सभी बच्चों को टीम लीडर भूपेंद्र शर्मा, गौरव सिंघल, सतीश अग्रवाल, श्रीमती अल्पना सिंघल और लोकेश वैश्य ने ट्रेकिंग के दौरान आवश्यक सावधानियां के विषय में बताया।
साथ ही नरेश्वर मंदिर पर सीढिओ से नीचे उतरते वक्त अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी। 2 किलोमीटर एक तरफ से ट्रैक करते हुए सभी बच्चे हंसते मुस्कुराते और गाते हुए चारों तरफ के प्राकृतिक दृश्य का आनंद लेते हुए तालाब पर पहुंचे। वहां से धीरे-धीरे सीढिय़ों पर होते हुए नरेश्वर मंदिर की पहाड़ी पर पहुंच गए। सभी बच्चों को मंदिरों की ऐतिहासिक जानकारी प्रदान की गई। वहां पर सभी ने मंदिरों के दर्शन किए। पश्चात सभी वापस ट्रैकिंग करते हुए वापस आ गए। सभी बच्चों को यूथ हॉस्टल के विषय में जानकारी प्रदान की गई और भविष्य में आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों में भाग लेने का आग्रह किया गया।
