वकालत का पेशा प्रतिबद्धता व विचारों की स्पष्टता पर आधारित

जबलपुर। वकालत एक ऐसा पेशा है जो प्रतिबद्धताएं तैयारी, विचारों की स्पष्टता और कानून के शासन के प्रति सम्मान पर आधारित है। बार और बेंच, न्याय रथ के दो पहिए हैं, जिनके बीच तालमेल अपरिहार्य है। ऐसा इसलिए क्योंकि एक के बिना दूसरा अधूरा है। विचार सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस जेके माहेश्वरी ने रखे। जस्टिस माहेश्वरी शनिवार को आईआईआईटीडीएम सभागार में वकालत व व्यावसायिक दक्षता, उत्कृष्टता की खोज विषय पर आयोजित सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर मुख्य अतिथि की आसंदी से बोल रहे थे।

इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा, जस्टिस आलोक अराधे, दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश व आर्म फोर्स ट्रिब्यूनल के चेयरमैन जस्टिस राजेंद्र मेनन, मप्र उच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा, प्रशासनिक न्यायाधीश विवेक रूसिया के अलावा दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस पुरुषेंद्र कौरव सहित अन्य उपस्थित थे।

एक कदम से शुरू होती है हजार मील की यात्रा- जस्टिस माहेश्वरी

इस अवसर पर जस्टिस जेके महेश्वरी ने पेशेवर नैतिकता और क्षमता से जुड़े बढ़ते सवालों पर चिंता व्यक्त करते हुए अधिवक्ता संघ से उच्च नैतिक मानकों को बनाए रखने के लिए सक्रिय कदम उठाने का आग्रह किया। उन्होंने प्रख्यात दार्शनिक लाओत्जु का हवाला देते हुए कहा कि हजार मील की यात्रा एक कदम से शुरू होती है और इस सम्मेलन के माध्यम से यह महत्वपूर्ण पहला कदम उठाने में मप्र राज्य न्यायिक अकादमी की पहल सराहनीय है।

अधिवक्ताओं की पेशेवर तैयारी न्यायदान के लिये महत्वपूर्ण: जस्टिस शर्मा

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा ने न्यायालयों और वादियों, दोनों की सहायता करने में अधिवक्ताओं की आवश्यक भूमिका पर प्रकाश डाला और कहा कि अधिवक्ताओं की पेशेवर तैयारी न्याय प्रदान करने को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करती है। उन्होंने सम्मेलन की सराहना करते हुए कहा कि यह वकालत कौशल को बढ़ाने और कानूनी पेशे को मजबूत करने के लिए एक सार्थक पहल है।

अधिवक्ता न्याय व्यवस्था का आधारभूत स्तंभ: जस्टिस आराधे

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस आलोक अराधे ने विधिक पेशे की उत्कृष्ट परंपरा पर प्रकाश डालते हुए अधिवक्ताओं को न्याय व्यवस्था का एक आधारभूत स्तंभ, अनुनय-विनय में पारंगत और परिशुद्धता में पारंगत बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि व्यावसायिक दक्षता केवल एक तकनीकी आवश्यकता नहीं है, बल्कि ईमानदारी, अध्ययन और चिंतन पर आधारित एक आजीवन नैतिक और बौद्धिक प्रयास है।

उद्घाटन के बाद तकनीकी सत्रों में न्यायाधीशों ने किया संबोधित

उद्घाटन सत्र के दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीशों द्वारा तकनीकी सत्र में दिल्ली हाईकोर्ट जस्टिस मनोज कुमार ओहरी, जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव, जस्टिस, दिल्ली हाई,कोर्ट की पूर्व जस्टिस मुक्ता गुप्ता, जस्टिस कामेश्वर राव, जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद, पूर्व जस्टिस रेखा पल्ली, जस्टिस नवीन चावला, जस्टिस जसमीत सिंह, न्यायमूर्ति अमित बंसल पैनलिस्ट के रूप में शामिल हुए। दिन का समापन एक चिंतन सत्र के साथ हुआ। सत्र के मुख्य अतिथि हाईकोर्ट के चीफ संजीव सचदेवा थे। प्रशासनिक न्यायाधीश विवेक रूसिया और जस्टिस विवेक अग्रवाल ने भी विचार प्रस्तुत किए। हाईकोर्ट बार के अध्यक्ष धन्य कुमार जैन, हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार के अध्यक्ष संजय अग्रवाल, सीनियर एडवोकेट्स काउंसिल के माहसचिव आदित्य अधिकारी, स्टेट बार चेयरमैन राधेलाल गुप्ता, हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल धरमिंदर सिंह, उमेश पांडव निदेशक एमपीएसजेए, रजिस्ट्री के अधिकारी, राज्य न्यायिक अकादमी के अधिकारी मौजूद थे। उक्त आयोजन में जबलपुर और आसपास के जिलों के 600 से अधिक अधिवक्ताओं ने भाग लिया।

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