
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक जैन एकलपीठ ने एक मामले में व्यवस्था दी है कि वरिष्ठता का प्रारंभिक बिंदु मूल नियुक्ति की तिथि है, इसके अलावा और कुछ नहीं है। इस मत के साथ न्यायालय ने याचिकाकर्ता की वरिष्ठता उसकी मूल नियुक्ति करकेली से मानते हुए उसे असिस्टेंट ग्रेड-टू के पद पर प्रमोशन सहित सभी अनुशाांगिक लाभ प्रदान करने निर्देश दिये है। इसके लिए 45 दिन की मोहलत दी है।
याचिकाकर्ता शहडोल निवासी गीता प्रसाद शुक्ला की ओर से दलील दी कि याचिकाकर्ता की मूल नियुक्ति 15 मई1987 में करकेली शहडोल में हुई थी। याचिकाकर्ता को 1997 में सोहागपुर में स्थानांतरित किया गया और तभी से उसकी वरिष्ठता की गणना की गई। इस वजह से उससे कनिष्ठ कर्मी को प्रमोशन का लाभ दे दिया गया और याचिकाकर्ता उससे वंचित रह गया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने पाया कि नियमानुसार वरिष्ठता की गणना मूल नियुक्ति तिथि से होनी चाहिए। एकलपीठ ने निर्देशित किया कि याचिकाकर्ता की वरिष्ठता भी करकेली में उसकी नियुक्ति की तिथि से उसकी सेवाओं की गणना करके तय की जाए। वरिष्ठता तय करने के बाद उसे प्रमोशन सहित सभी आर्थिक लाभ भी प्रदान करें।
