नयी दिल्ली, 08 मई (वार्ता) वैभव सूर्यवंशी जैसी युवा प्रतिभाओं के तेजी से उभरने ने स्वाभाविक रूप से मॉडर्न क्रिकेट की दुनिया में सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गज खिलाड़ियों के साथ तुलना शुरू कर दी है।
हालांकि, आईपीएल की कई फ्रेंचाइजी का प्रतिनिधित्व करने वाले पूर्व भारतीय अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी केदार जाधव ने उन उभरती प्रतिभाओं की सराहना करने और दिग्गज खिलाड़ियों के साथ उनकी तुलना करने पर एक स्पष्ट दृष्टिकोण सामने रखा है। केदार जाधव ने कहा, “कोई भी तुलना नहीं कर सकता या यह भी नहीं कह सकता कि कोई दूसरा ‘सचिन तेंदुलकर’ बन रहा है। तेंदुलकर अपने आप में एक मास्टर हैं और क्रिकेट के खेल में उनके योगदान के करीब कोई भी नहीं आ सकता है।”
उन्होंने कहा, “हां, ऐसे युवा हो सकते हैं जो अच्छा क्रिकेट खेल रहे हैं, लेकिन उनकी तुलना तेंदुलकर जैसे किसी खिलाड़ी से कभी नहीं की जा सकती और न ही की जानी चाहिए।”
जाधव के लिए यह मुद्दा उभरते खिलाड़ियों को कम आंकने का नहीं है, बल्कि दिग्गज खिलाड़ी जिस गरिमा और गौरव का प्रतिनिधित्व करते हैं, उसे बनाए रखने का है। उन्होंने समझाया, “दिग्गज खिलाड़ी केवल आंकड़ों या रिकॉर्ड के बारे में नहीं होते हैं। वे इस बारे में होते हैं कि उन्होंने लंबे समय तक खेल के लिए क्या किया है। उन्होंने खेल को आगे बढ़ाया है, लाखों लोगों को प्रेरित किया है और एक ऐसी विरासत बनाई है जो अपने आप में बेमिसाल है।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि तेंदुलकर का करियर और सफर हर मायने में अनोखा था। जाधव ने आगे कहा, “तेंदुलकर ने जो हासिल किया वह हर मायने में 20-25 वर्षों के निरंतर प्रदर्शन का परिणाम था। यह सिर्फ रन बनाने के बारे में नहीं है। यह दबाव और उम्मीदों को संभालने और फिर भी हर बार शानदार प्रदर्शन करने के बारे में है।”
सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ियों पर अपना ध्यान केंद्रित करते हुए, जाधव ने उनकी क्षमता को उजागर करने में सावधानी बरती लेकिन एक बात स्पष्ट भी कर दी। उन्होंने कहा, “वैभव एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है। वह अच्छे संकेत दे रहे हैं, वह प्रदर्शन कर रहे हैं, और उनके करियर के इस पड़ाव पर यही मायने रखता है।”
हालांकि, उन्होंने दोहराया कि शुरुआती सफलता से समय से पहले तुलना नहीं होनी चाहिए। जाधव ने कहा, “उसे खेलने दें, उसे आगे बढ़ने दें। हर खिलाड़ी का अपना सफर होता है। यदि आप बहुत जल्दी तुलना करना शुरू कर देते हैं, तो आप उस खिलाड़ी पर बेवजह का दबाव डाल रहे होते हैं।”
जाधव का मानना है कि ऐसा दबाव अक्सर उल्टा असर डाल सकता है। उन्होंने बताया, “जब आप किसी युवा की तुलना किसी दिग्गज से करते हैं, तो हर पारी एक परीक्षा बन जाती है। लोग हर बार उसके बल्लेबाजी करने आने पर महानता की उम्मीद करने लगते हैं, और खिलाड़ी का विकास इस तरह से नहीं होता है।”
उन्होंने युवा क्रिकेटरों को मैदान के बाहर की चकाचौंध से बचाने के महत्व पर भी ध्यान आकर्षित किया। सूर्यवंशी के बारे में जाधव ने कहा, “इस स्तर पर, उन्हें मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से जितना संभव हो सके दूर रहना चाहिए। उनका ध्यान क्रिकेट पर, अपने खेल में सुधार करने पर और हर दिन सीखने पर होना चाहिए।”
