वंचितों को वरीयता देने हमारी नीति और नीयत बिल्कुल साफ: पीएम

जबलपुर। हमारी नीति और नीयत बिल्कुल साफ है वंचितों को वरीयता देना। हमारा लक्ष्य है विकास में न कोई पीछे रहे, न कोई छूटने पाये। हम इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। देश की सभी जनजातीय वर्गों और समुदायों का समग्र कल्याण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह बातें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्चुअल राज्यस्तरीय जनजातीय गौरव दिवस समारोह में कहीं।

प्रधानमंत्री ने विपक्षी सरकारों पर जनजातीय वर्ग के हितों की उपेक्षा करने का जिक्र करते हुए कहा कि जनजातीय वर्ग 6 दशकों तक उपेक्षित रहे। स्व.अटल जी की सरकार में पहली बार जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया गया। हमने इस मंत्रालय का बजट कई गुना बढ़ा दिया है। आज हम जनजातीय वर्ग की शिक्षा-दिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और जनजातीय बहुल क्षेत्रों में कनेक्टिविटी सहित हर दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जनजातीय वर्ग इस देश के मूल निवासी हैं। ये प्रकृतिपूजक जनजातीय बंधु हमारे राष्ट्र की आत्मा हैं। इनके पास ज्ञान का अपार भण्डार है। इनकी पूरी जीवनशैली में विज्ञान है। इनकी संस्कृति और परम्पराओं में दर्शन है और इनके सम्पूर्ण व्यक्तित्व में प्रकृति और पर्यावरण की बेहतर समझ है। इनसे हमें प्रकृति और वन्य प्राणियों के साथ सामंजस्य और साहचर्य जीवन की सीख मिलती है, पिछले एक साल में देश में कई धामों का विकास हुआ है। कितने ही जनजातीय नायक-नायिकाओं ने आजादी की मशाल को आगे बढ़ाया।

 

अंग्रेजों को चैन से नहीं बैठने दिया

पीएम ने कहा कि मध्यप्रदेश के टंट्या भील जैसे अनेक नायकों ने आजादी के लिए अपार त्याग किया। अंग्रेजों को चैन से नहीं बैठने दिया। गुजरात के गोविंद गुरु चैत ने भगत आंदोलन का नेतृत्व किया। सांबरकाठा के पास चिथरिया में जलियांवाला बाग जैसी घटना हुई थी। स्वंतत्रता आंदोलन में जनजातीय समाज के योगदान को कभी भी भुलाया नहीं जा सकता है। लेकिन कुछ ही परिवारों को आजादी का श्रेय देने के लिए जनजातीय नायकों के त्याग और बलिदान को नकार दिया गया था। हमने जनजातीय गौरव दिवस के माध्यम से भावी पीढिय़ों को जनजातीय गौरव से परिचित कराया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि गुजरात में भी कई ऐसे इलाके थे, जहां जनजातीय क्षेत्रों में शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को अभाव था। हमने उन परिस्थियों को बदलने का काम किया। पिछले 2 दशकों में जनजातीय इलाकों में 10 हजार से अधिक स्कूल और 2 दर्जन से अधिक साइंस, आर्ट और कॉमर्स कॉलेज बने हैं। गुजरात में दो ट्राइबल यूनिवर्सिटी बनवाई। जनजातीय वर्ग के बच्चे आज डॉक्टर, इंजीनियर और सरकारी नौकरियां कर रहे हैं। देशभर के एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों के निर्माण एवं अधोसंरचना विकास पर 18 हजार करोड़ रुपए से अधिक खर्च किए गए हैं। इन स्कूलों में प्रवेश में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। दुनिया में देश की शान बढ़ाने में जनजातीय युवाओं का बड़ा योगदान है।

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