बीजिंग | चीन की राष्ट्रीय कॉलेज प्रवेश परीक्षा ‘गाओकाओ’ को दुनिया की सबसे चुनौतीपूर्ण और सुरक्षित परीक्षा माना जाता है। भारत में नीट (NEET) जैसी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की खबरों के बीच, चीन इस परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के लिए सैन्य अभियान जैसी सुरक्षा व्यवस्था अपनाता है। करोड़ों छात्रों के भविष्य का फैसला करने वाली इस परीक्षा के दौरान पूरे देश में सख्त प्रोटोकॉल लागू रहता है। कई शहरों में तो ट्रैफिक तक रोक दिया जाता है ताकि छात्र बिना किसी बाधा के केंद्र तक पहुंच सकें। परीक्षा केंद्रों पर एआई (AI) निगरानी, फेस रिकॉग्निशन और मेटल डिटेक्टरों का जाल बिछा होता है।
गाओकाओ के प्रश्नपत्रों की गोपनीयता का आलम यह है कि इन्हें कड़ी सुरक्षा के बीच जेलों में प्रिंट कराया जाता है। पेपर सेट करने वाले विशेषज्ञों को कई हफ्तों तक बाहरी दुनिया से पूरी तरह अलग रखा जाता है; उनके पास फोन या इंटरनेट की सुविधा नहीं होती। शिक्षा मंत्रालय और राज्य गुप्त सुरक्षा प्रशासन की सीधी निगरानी में मुद्रण कार्य होता है। प्रिंटिंग प्रेस के हर कोने पर 24 घंटे सशस्त्र गार्ड और कैमरों का पहरा रहता है। यहाँ तक कि प्रिंटिंग में लगे कर्मचारियों को भी अज्ञात और अलग-अलग स्थानों पर रखकर उनकी कड़ी निगरानी की जाती है।
प्रश्नपत्रों को केंद्रों तक पहुँचाने के लिए उन वाहनों का उपयोग किया जाता है जिनकी सुरक्षा बैंकों की नकदी ले जाने वाली आर्मर्ड गाड़ियों से भी कहीं अधिक होती है। इन वाहनों में सैटेलाइट नेविगेशन और रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम लगे होते हैं, जिनकी ट्रैकिंग सीधे मुख्यालय से की जाती है। वाहनों के बेड़े के साथ पुलिस और मिलिट्री के जवान चलते हैं। रिपोर्टों के अनुसार, परीक्षा के दौरान तकनीक का दुरुपयोग रोकने के लिए एआई कंपनियां भी अपनी सेवाओं को सीमित कर देती हैं। चीन में इस परीक्षा में धोखाधड़ी करने पर सात साल तक की जेल की सजा का कड़ा कानून भी लागू है।

