
सुरेश पाण्डेय पन्ना। पूरे भारत में पन्ना का हीरा प्रसिद्ध है। जहां पन्ना में हीरे जैसा बहुमूल्य रत्न का भंडार है। जो अभी तक पूरे देश में ही जाना जाता था लेकिन जीआई टैग मिलने से पूरे विश्व में पन्ना का हीरा जाना जायेगा और देश दुनिया मे इसकी मार्केटिंग एवं प्रतिष्ठा बढेगी। कंट्रोलर जनरल आफ पेटेंट, डिजाइन एंड ट्रेडमार्क, चेन्नई ने पन्ना के हीरों को जीआइ टैग देने की आधिकारिक घोषणा जारी कर दी। इसी के साथ जीआई टैग पाने वाला पन्ना का हीरा प्रदेश का 21वां उत्पाद बन गया। भारत मे जीआई टैग प्रणाली 2003 में लागू हुई थी। तब से अब तक यह मान्यता मिल चुकी है। जिनमें नवीनतम नाम पन्नाा डायमंड का दर्ज किया गया है। इस उपलब्धि से पन्ना के हीरों को दुनियाभर में मजबूत पहचान मिलेगी। यह प्रमाणित ब्रांड के रूप में उभरेगा। इसका सीधा लाभ प्रदेश को होगा। पन्ना की खदानों से तीन श्रेणी के हीरे निकलते हैं। जैम क्वालिटी सफेद हीरा, आफ कलर मैला रंग और इंडस्ट्रियल क्वालिटी कोका कोला रंग इनकी क्वालिटी और कीमत का निर्धारण हीरा कार्यालय के विशेषज्ञ पारखियों द्वारा चमक और संरचना के आधार पर किया जाता है। पन्ना के हीरों की अब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रतिष्ठा बढेगी, पन्ना के हीरों की पहचान विश्व स्तर पर मजबूत होगी, जिससे निर्यात और व्यापार मे वृद्धि की संभावना मिलेगा।
जीआइ टैग क्या हैः – जीआई टैग किसी उत्पादन की भौगोलिक विशिष्टता का कानूनी प्रमाण है। यह प्रमाणित करता है कि उत्पाद एक खास क्षेत्र से ही प्राप्त होता है। और उसकी गुणवत्ता पारंपरिक पद्धति व विशेषताएं उसी क्षेत्र से जुडी होती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में जिला प्रशासन को केन्द्रीय वाणिज्य मंत्रालय से संबद्ध ह्यूमन वेलफेयर सोसाइटी, वाराणसी ने तकनीकी सहयोग दिया। इनके माध्यम से आवेदन की तैयारियों से लेकर दस्तावेजीकरण तक पूरा समर्थन दिया गया। अवधि के तत्कालीन कलेक्टर ने 2023 में जीआई टैग के लिए आवेदन किया, जिसे 7 जून 2023 को मंजूरी मिली।
