सीहोर। जिले में इस बार नवंबर की शुरुआत से ही सर्दी ने दस्तक दे दी है. पिछले एक सप्ताह से दिन में सर्द हवाएं चल रही हैं, जबकि रात और सुबह के समय ठिठुरन महसूस की जा रही है. आमतौर पर ऐसा मौसम नवंबर के आखिरी में बनता है, लेकिन इस बार मौसम ने कुछ जल्दी करवट ले ली है. स्थिति यह है कि पिछले एक सप्ताह से न्यूनतम तापमान 8 डिग्री के आसपास बना हुआ है. ठंड के शुरुआती असर से ही स्वास्थ्य पर प्रभाव दिखने लगा है. गुरुवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की संख्या बढ़कर 1188 तक पहुंच गई ह. इनमें सबसे ज्यादा मरीज सर्दी, खांसी, बुखार और सांस की दिक्कत वाले हैं. डॉक्टरों का कहना है कि इस बार मौसम तेजी से बदल रहा है. इससे लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं.
बीते सप्ताह से रात का न्यूनतम तापमान लगातार 8 डिग्री के आसपास बना हुआ है, जबकि दिन का अधिकतम तापमान 29 डिग्री से आसपास स्थिर है. गुरुवार को अधिकतम तापमान 28.9 डिग्री और न्यूनतम तापमान 8.3 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड हुआ है. मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में पारा और नीचे जा सकता है. जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में ओपीडी में मरीजों की संख्या औसतन एक हजार के पार पहुंच गई है. गुरुवार को कुल 1188 मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचे. इनमें सबसे ज्यादा बच्चे और बुजुर्ग हैं. खांसी-जुकाम के अलावा गले के संक्रमण और वायरल फीवर के केस भी बढ़े हैं. यही नहीं ठंड के असर से हृदय रोग संबंधी मरीज भी तेजी से बढ़े हैं. चिकित्सकों ने छोटे बच्चों और बुजुर्गों की सेहत का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है. ठंड के तेवर देखते हुए गर्म कपड़ों की बिक्री बढ़ गई है तो ठंडी हवाओं से बचने के लिए लोग रात को जल्दी घरों में दुबकने लगे हैं.
मौसम वैज्ञानिकों का कहना, अब और बढ़ेगी सर्दी
हिमालय क्षेत्र में वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) इस बार एक सप्ताह पहले ही सक्रिय हो गए हैं. इससे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में बर्फबारी शुरू हो चुकी है. वहीं उत्तर से दक्षिण की ओर बहने वाली ठंडी हवाओं का असर अब मध्यप्रदेश के मालवा क्षेत्र तक पहुंच गया है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल नवंबर का दूसरा सप्ताह ठंड के लिहाज से अहम रहेगा. ठंडी हवाओं का रुख नहीं बदला तो दिसंबर की शुरुआत में ही कड़ाके की सर्दी पड़ सकती है. पिछले एक दशक से नवंबर में ठंड के साथ हल्की बारिश का ट्रेंड देखा जा रहा है. इस बार भी ऐसी ही स्थिति बन सकती है.
शरीर को स्वेटर व गर्म कपड़ों से ढांकें
ठंड के बढ़ते असर के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है. ऐसे में सर्दी-जुकाम, अस्थमा और जोड़ों के दर्द जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं. बुजुर्गों, बच्चों और हृदय रोगियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. सुबह-शाम ठंडी हवाओं से बचें, गुनगुना पानी पिएं और पर्याप्त गर्म वस्त्र पहनें. भोजन में सूप, हरी सब्जियां, गुड़, तिल और अदरक जैसी गर्म प्रकृति वाली चीजें शामिल करें. शरीर को हाइड्रेटेड रखना जरूरी है, क्योंकि ठंड में प्यास कम लगती है पर डिहाइड्रेशन जल्दी होता ह. हल्की कसरत और पर्याप्त नींद से शरीर की गर्मी और रोग-प्रतिरोधक क्षमता दोनों बनी रहती हैं.
डॉ. आरके वर्मा,
एमडी, जिला अस्पताल
