अजाक्स की आपत्ति दरकिनार, जारी रहेगी प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई

जबलपुर: राज्य में प्रमोशन में आरक्षण के मामले पर दायर याचिकाओं पर बुधवार को मप्र हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। शुरुआत में ही अजाक्स (अनुसूचित जाति, जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ) की ओर से आपत्ति जताई गई। सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में आरबी राय मामले के लंबित होने का हवाला दिया गया। जिसमें कहा गया कि इसलिए हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं होनी चाहिए।

चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले में नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यह मामला अलग है, सुनवाई क्यों नहीं होनी चाहिये। उक्त मत के साथ न्यायालय ने आपत्ति को अस्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई 13 नवंबर को जारी रखने के निर्देश दिये।उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट में यह मामले भोपाल निवासी डॉ. स्वाति तिवारी व अन्य की ओर से दायर किये गये है।

जिसमें मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम 2025 को चुनौती दी गई है। दलील दी गई कि वर्ष 2002 के नियमों को हाईकोर्ट के द्वारा आरबी राय के केस में समाप्त किया जा चुका है। इसके विरुद्ध मप्र शासन ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट में मामला अभी लंबित है, इसके बावजूद मप्र शासन ने महज नाम मात्र का शाब्दिक परिवर्तन कर जस के तस नियम बना दिए।

वहीं मामले में अजाक्स संघ सहित आरक्षित वर्ग की ओर से अनेक अधिकारियों व कर्मचारियों ने इस मामले में हस्तक्षेप याचिकाएं दाखिल की हैं। बुधवार को याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अमोल श्रीवास्तव ने कुछ देर नियम की असंवैधानिकता के पक्ष में तर्क रखे।

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