जबलपुर: संभाग के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में खून की दलाली के गिरोह में अब अस्पताल के ही सरकारी कर्मचारी भी शामिल हो रहे हैं और गरीब, असहाय मरीजों व उनके परिजनों को 2 से लेकर 5-5 हजार रुपए में खून बेचने के काले धंधे को गुलजार कर रहे हैं।इसको लेकर सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में स्पष्ट देखा जा रहा है कि ये सरकारी कर्मचारी अनिल रजक वॉर्ड ब्वॉय, प्राईवेट वार्ड ब्वॉय व एक अन्य व्यक्ति के साथ खून का सौदा कर रहा है।
जानकारी के अनुसार वायरल वीडियो में नीली शर्ट पहना हुआ व्यक्ति सरकारी कर्मचारी वार्ड ब्वॉय बताया जा रहा है वहीं एक्टिवा पर जो युवक खाकी वर्दी पहने हुए बैठा है उसका नाम बंटी बताया जा रहा है और ये यूडीएस कंपनी का ठेका कर्मचारी है। वीडियो में एक अन्य व्यक्ति भी दिखाई दे रहा है जो कि मेडिकल का हाउसकीपिंग का काम करता है। वायरल वीडियो में बकायदा ये सुनाई दे रहा है कि यहां सभी को लेकर चलना पड़ता है।
डीन के फरमान पर क्या पड़ेगा असर?
कुछ दिनों पहले मेडिकल में पकड़े गए खून के 3 दलालों के बाद मेडिकल अस्पताल प्रबंधन सखत हो गया है। मेडिकल डीन डॉ. नवनीत सक्सेना ने ब्लड बैंक प्रभारी और सुरक्षा एजेंसी के अधिकारियों को दो टूक कह दिया है कि यदि किसी मरीज के लिए खून की जरूरत होती है तो ब्लड बैंक तक जूनियर डॉक्टर मरीज का सैंपल लेकर जाएंगे। जिससे मरीज व उनके परिजन दलालों के चंगुल में न फंस सकें। देखना ये होगा कि डीन के इस फरमान का किस हद तक अस्पताल में पालन होता है।
कुछ इस तरह होता है कारनामा
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मेडिकल कॉलेज अस्पताल में किस मरीज को कितना खून चाहिए, वह किस वार्ड में भर्ती है, किस बीमारी का इलाज चल रहा है, कौन डॉक्टर उसका इलाज कर रहा है, ये पूरी जानकारी मेडिकल के कुछ ऐसे ही दलाल कर्मचारियों के द्वारा खून के दलालों तक पहुंचाई जाती है और फिर मेडिकल में खून का काला धंधा पनपने लगता है।
पैसे देने पर नहीं लगना पड़ता लाइन पर
गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले भी मेडिकल कॉलेज अस्पताल का एक वीडियो सामने आया था जिसमें एक वार्ड ब्वॉय महिला मरीजों से रुपए लेकर उसे बिना लाइन में लगवाए सीधे डॉक्टर तक पहुंचाते दिखे हैं। इसको लेकर अस्पताल की लंबी लाइन में लगीं दूसरी महिला मरीजों ने विरोध किया और कहा था कि वे सुबह से लेकर दोपहर 3 बजे तक लाइन में लगीं रहीं लेकिन उनका नंबर नहीं आया लेकिन जो मरीज व उनके परिजन वार्ड ब्वॉय को रुपए देते हैं वे उन मरीजों को तत्काल डॉक्टर के पास लाकर खड़ा कर देते हैं। आरोप ये भी लगे कि जितने रुपए दिनभर में एकत्रित होते हैं उनका हिस्सा डॉक्टर तक भी पहुंचाया जाता है।
