काल भैरव अष्टमी : ग्वालियर के 119 वर्ष पुराने मंदिर में हुआ विशेष पूजन

ग्वालियर: अगहन बदी अष्टमी को आज शहर में स्थित मंदिरों में भैरव अष्टमी मनाई जा रही है। भैरव अष्टमी का पर्व भैरव और उनके सभी रूपों के समर्पित पर्व है। भैरवनाथ को भगवान शिव का ही रूप माना जाता है। इसलिए भगवान शिव के रौद्ररूप काल भैरव की पूजा करने से भय और अवसाद का अंत होता है और किसी भी कार्य में आ रही बाधा समाप्त होती है।
सराफा बाजार बच्छराज का बाड़ा स्थित 119 वर्ष से भी अधिक प्राचीन भैरव मंदिर में विशेष पूजन हुआ। संजीव पारख ने बताया कि भैरव अष्टमी पर त्रिमूर्ति भैरव मंदिर में सुबह भैरव महाराज का विधि विधानपूर्वक मंत्रोचार के साथ महाभिषेक किया गया। अभिषेक के बाद हवन हो रहा है। शाम को मंदिर की सजावट, मूर्तियों का श्रृंगार के साथ भैरव महाराज को प्रसाद चढ़ाकर कर दर्शनार्थियों को वितरित किया जाएगा।

सुबह हुआ अभिषेक, शाम को लगेगा छप्पन भोग : भैलसा वाली माता मंदिर के ऊपर अमरावती पहाड़ पर स्थित 500 वर्ष पुराने प्राचीन काल भैरव मंदिर में भैरव अष्टमी मनाई जा रही है। मंदिर में सुबह ब्राह्मणों द्वारा काल भैरव का पूजन कर अभिषेक किया गया। तदोपरांत काल भैरव का विशेष ऋंगार कर 51 किलो मूंग दाल के मंगोड़े का भाेग लगाया गया। शाम को छप्पन भोग लगाया जाएगा।

मंदिर के बारे में मान्यता है कि माता के दर्शन के बाद काल भैरव के दर्शन करना आवश्यक होता है तभी भेलसे वाली माता के दर्शन पूर्ण माने जाते हैं।छप्पन भोग के साथ होगा भंडारा : श्री मंशापूर्ण हनुमान मंदिर पड़ाव पुल के नीचे स्थित भैरव मंदिर पर सुबह ब्रह्म मुहुर्त में भैरव नाथ का अभिषेक एवं श्रृंगार किया गया। शाम पांच बजे से छप्पन भोग लगेगा और शाम सात बजे से भंडारा प्रारंभ हो जाएगा, जो रात्रि तक चलेगा।

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