सुप्रीम कोर्ट ने नजरबंदी के खिलाफ अमृतपाल सिंह की याचिका पर विचार करने से किया इनकार

नयी दिल्ली, 10 नवंबर (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने पंजाब के सांसद अमृतपाल सिंह की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) 1980 के तहत अपनी नजरबंदी को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से सोमवार को इनकार कर दिया।

अदालत ने उन्हें पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय जाने की छूट प्रदान की और अनुरोध किया कि उच्च न्यायालय इस मामले का फैसला छह सप्ताह के भीतर करे।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और एनवी अंजारिया की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।

वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्विस ने श्री सिंह की ओर से याचिका के पक्ष में तर्क रखा। उन्होंने दलील दी कि श्री सिंह ढाई साल से अधिक समय से नजरबंदी में हैं, और यह सब एक ही प्राथमिकी के आधार पर हो रहा है, जिसमें आरोपपत्र पहले ही दाखिल किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि देश की शीर्ष अदालत ने लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि अंगमो द्वारा दायर एक ऐसी ही याचिका पर विचार किया था, जिसमें उन्होंने एनएसए के तहत उनकी हिरासत को चुनौती दी थी।

न्यायमूर्ति कुमार ने स्पष्ट किया कि वांगचुक मामले में परिस्थितियां अलग थीं क्योंकि बंदी को दूसरे राज्य में स्थानांतरित कर दिया गया था, जिससे तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता थी।

न्यायमूर्ति कुमार ने शुरुआत में कहा कि उचित कदम उच्च न्यायालय जाना होगा।

अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले पर विचार करने से इनकार करने से याचिकाकर्ता को क्षेत्राधिकार वाले उच्च न्यायालय में उचित राहत प्राप्त करने से नहीं रोका जा सकता।

 

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