
छिंदवाड़ा. सतपुड़ा की वादियों में जब पहाड़ों की हवा में महकती मिट्टी की सुगंध घुलती है और ढोल-मांदर की ताल पर गांव जाग उठता है, तब सावरवानी जैसे छोटे से गांव में खुशियों की दास्तान लिखी जाती है। यही दास्तान अब विदेशी मेहमान भी अपने दिल में संजोकर ले जा रहे हैं। जिले के पर्यटन ग्राम सावरवानी में स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम से आए पर्यटकों ने पिछले चार दिन ऐसे गुजारे, मानो बचपन की सादगी फिर से लौट आई हो। झिरपा के हाट में उन्होंने ग्रामीणों के संग हंसी-ठिठोली की, साड़ी और स्कार्फ खरीदे, सिंघाड़े और देसी मिठाई का स्वाद चखा और बैलगाड़ी की सवारी करते हुए गांव की गलियों में घूमे। यहां के होमस्टे सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि भावनाओं का ठिकाना हैं। मक्के की रोटी, बैंगन का भरता और खीर का स्वाद उनके लिए किसी पांच सितारा भोजन से कम नहीं था। गांव की औरतों की मुस्कान, बच्चों की मासूम हंसी और मिट्टी के घरों की सुगंध ने उन्हें अपना बना लिया।
होमस्टे बना सांस्कृतिक धरोहर
सावरवानी को मॉडल गांव के रूप में विकसित किया गया है। स्वच्छता, बिजली, पानी और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों ने इसे न केवल आकर्षक बनाया है, बल्कि आत्मनिर्भर भी। मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड और विलेज वे के सहयोग से यहां के होमस्टे अब सांस्कृतिक धरोहर बन चुके हैं, जहां हर ईंट में अपनापन है और हर आंगन में अतिथि देवो भव: की परंपरा जीवित है। सावरवानी में बीते इन चार दिनों ने विदेशी मेहमानों को सिर्फ प्रकृति नहीं, बल्कि भारत की आत्मा से मिलवाया और इस मिलन ने एक नई खुशियों की दास्तां लिख दी।
