मंडला: विश्व की सबसे बड़ी जैव विविधता की प्रयोगशाला राष्ट्रीय उद्यान कान्हा है। जहां पर हर प्रकार के जीव जंतु वनस्पति वनों से आच्छादित है। दुर्लभ प्रजाति के जीव जंतु एवं वन्य प्राणी की उपलब्धता है। राष्ट्रीय उद्यान कान्हा के नाम से मंडला जिले को पूरी दुनिया में जाना जाता है। कान्हा नेशनल पार्क भारत के मध्यप्रदेश में मंडला और बालाघाट जिले की सीमा कान्हा में स्थित है। 1930 के दशक में कान्हा क्षेत्र को दो अभ्यारण्यों में बांटा गया था, हालोन और बंजर।
जिसका एरिया 250 और 300 वर्ग किलोमीटर था। वहीं कान्हा नेशनल पार्क का अब विस्तार हो चुका है। अब कान्हा क्षेत्र में कोर 941.792, बफर 1134.319 और फेन 110.740 वर्ग किलोमीटर में फैला है।जानकारी अनुसार विश्व की सबसे बड़ी जैव विविधता की प्रयोगशाला में मप्र के वन्यजीव संरक्षण के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए कान्हा टाइगर रिजर्व में एक बार फिर जंगली भैंसों की वापसी होने जा रही है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ने कान्हा में जंगली भैंसों को फिर से बसाने की विस्तृत योजना को हरी झंडी दे दी है। मध्यप्रदेश में कभी बड़ी संख्या में पाए जाने वाले जंगली भैंसे अब यहां विलुप्त हो चुके हैं।
पांच साल की कार्य योजना तैयार
कान्हा टाइगर रिजर्व के उप संचालक पुनीत गोयल ने बताया कि एनटीसीए की स्वीकृति के बाद जंगली भैंसों को बसाने की योजना पर काम शुरू हो गया है। इस योजना के अनुसार असम से कुल 50 जंगली भैंसे कान्हा लाए जाएंगे। इसके लिए पांच साल की कार्ययोजना बनाई गई है, जिसके तहत प्रति वर्ष 10-10 भैंसे लाए जाएंगे।
हालेन वैली में बन रहा विशेष बाड़ा
बताया गया कि पुनर्वास प्रक्रिया के तहत इन भैंसों के लिए कान्हा की हालेन वैली में 150 हेक्टेयर का एक विशेष बाड़ा तैयार किया जा रहा है। शुरुआत में इन्हें इसी बाड़े में रखा जाएगा, जिससे वे नए वातावरण के अनुकूल हो सकें। इनकी संख्या बढऩे पर और अनुकूलन के बाद इन्हें धीरे-धीरे जंगल में छोड़ा जाएगा। आवश्यकतानुसार बाड़े का विस्तार भी किया जाएगा।
जंगली भैसों के लिए उपयुक्त है कान्हा की जलवायु
बताया गया कि वन्यजीव पुनर्वास के लिए कान्हा को चुनने का कारण वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की टीम का अध्ययन है। डब्ल्यूआईआई के अध्ययन में पाया गया कि कान्हा के विस्तृत घास के मैदान और यहाँ की जलवायु जंगली भैंसों के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं, जिससे उनके सफल पुनर्वास की संभावना अधिक है।
परिवहन एक बड़ी चुनौती
कान्हा प्रबंधन के लिए इन भैंसों को असम से कान्हा तक लाना एक बड़ी चुनौती है, क्योंकि इन्हें सड़क मार्ग से लाया जाएगा, जिसमें लगभग दो से तीन दिन का समय लगेगा। हालांकि कान्हा प्रबंधन इसके लिए पूरी तैयारी कर रहा है और सुरक्षित परिवहन सुनिश्चित करने के लिए असम और रास्ते में पडऩे वाले राज्यों के वन विभागों से समन्वय स्थापित किया जा रहा है।
