भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए जरूरी है पशु चिकित्सा का सहयोग

जबलपुर: आईसीएमआर- नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर रिसर्च इन ट्राइबल हेल्थ जबलपुर के सभागार में वन हेल्थ – यूनाइटेड फॉर ह्यूमन, एनिमल एंड एनवायरनमेंटल वेल-बीइंग विषय पर कंटिन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम विभागाध्यक्ष डॉ. राजेश तिवारी के नेतृत्व में डॉ. प्रोफेसर शशि प्रभा तोमर,संस्थागत नोडल अधिकारी, सामुदायिक चिकित्सा विभाग के द्वारा पूरा कराया गया।

जिसमें करीब 60 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें फैकल्टी सदस्य, पीजी छात्र, चिकित्सा अधिकारी, पैरामेडिकल एवं नर्सिंग स्टाफ शामिल रहे।मुख्य वक्ता एवं आयोजन की प्रमुख डॉ. शशि प्रभा तोमर ने वन हेल्थ दृष्टिकोण की संकल्पना, इसके व्यावहारिक अनुप्रयोग और विभिन्न क्षेत्रों के समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर विस्तृत जानकारी दी और कहा कि भविष्य की स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने के लिए चिकित्सा, पशु चिकित्सा और पर्यावरणीय विज्ञान का सहयोग आवश्यक है।
प्रतिभागियों ने प्रकृति को दर्शाया
इस दौरान प्रतिभागियों ने वन हेल्थ विषय की अंतर्विषयक प्रकृति को दर्शाया और चर्चाओं को समृद्ध बनाया। सत्र की शुरुआत डॉ. निशांत सक्सेना, वैज्ञानिक-सी, आईसीएमआर एनआईआरटीएच, प्रो. डॉ. के. बी. साहा, निदेशक एवं वैज्ञानिक-जी, आईसीएमआर एनआईआरटीएच के उद्बोधन से हुई। अंत में डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह, वैज्ञानिक-एफ, आईसीएमआर एनआईआरटीएच ने आभार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर जबलपुर चिकित्सा महाविद्यालय से डॉ. प्रशांत, डॉ आकांशा,डॉ प्रीति,डॉ कुलदीप डॉ सुनीता डॉ जीडी मेहरा सहित अन्य उपस्थित रहे।

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