नयी दिल्ली, 07 जून (वार्ता) केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्मों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि उनके नेटवर्क पर उपभोक्ताओं को अत्यावश्यक अलर्ट (सूचना) और भ्रामक विज्ञापनों या किसी प्रकार के अनुचित व्यापार व्यवहार में न फंसाया जाये।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने शनिवार को एक विज्ञप्ति में कहा, “ सभी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को सलाह दी गयी है कि वे परामर्श जारी होने के तीन महीने के भीतर डार्क पैटर्न की पहचान करने के लिए स्व-ऑडिट करें और यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठायें कि उनके प्लेटफॉर्म ऐसे डार्क पैटर्न से मुक्त हों।” डार्क पैटर्न ऐसे भ्रामक प्रयासों को कहा जाता है, जिनमें ग्राहकों को स्टॉक खत्म होने या किसी प्रलोभन के जरिये माल की बुकिंग तत्काल करने के लिए उकसाया जाता है।
सीसीपीए ने स्व-ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को यह भी स्व-घोषणा देने के लिए प्रोत्साहित किया है कि उनका प्लेटफॉर्म किसी भी डार्क पैटर्न में लिप्त नहीं है।
विज्ञप्ति के अनुसार यह उपाय उपभोक्ताओं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बीच विश्वास मजबूत करने की दृष्टि से किया गया है।
सीसीपीए ने कुछ मामलों में डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते पाये गये ई-कॉमर्स प्लेटफ़ॉर्म को नोटिस भी जारी किये हैं।
उपभोक्ता मामलों के विभाग ने डार्क पैटर्न के उल्लंघन की पहचान करने के लिए एक संयुक्त कार्य समूह (जेडब्ल्यूजी) का गठन किया है। इसमें संबंधित मंत्रालयों, नियामकों, स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठनों और एनएलयू के प्रतिनिधि शामिल हैं।
उपभोक्ता विभाग ने 2023 में डार्क पैटर्न की रोकथाम और विनियमन दिशानिर्देश अधिसूचित किये थे और 13 डार्क पैटर्न – झूठी तत्काल आवश्यकता, बास्केट स्नीकिंग, कन्फर्म शेमिंग, जबरन कार्रवाई, सदस्यता जाल, इंटरफेस हस्तक्षेप, चारा और स्विच, ड्रिप मूल्य निर्धारण, प्रच्छन्न विज्ञापन और सता, ट्रिक वर्डिंग, सास बिलिंग और मैलवेयर जैसे पैटर्न शामिल किये गये हैं।
