भोपाल। राजधानी में बच्चों की शिक्षा में ताले लगने की नौबत आ गई है. एक तरफ जिले में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं चल रही हैं. वही दूसरी तरफ एसआईआर में शिक्षकों की ड्यूटी बीएलओ के लिए लगा दी गई है. जिसके चलते स्कूल में शिक्षकों की कमी और बढ़ गई है. साथ ही पढाई बाधित हो रही है. जिले भर में 65 हजार बूथ लेवल ऑफिसर अब घर जाकर वोटर की जानकारी इकट्ठा करेंगे। इस 65 हजार की लिस्ट में 15 हजार की संख्या में शिक्षक शामिल हैं. अब इन शिक्षकों की जिम्मेदारी कौन सम्हालेगा इसका तो कुछ पता नहीं है. 4 नवम्बर से शुरू एसआइआर के काम के लिए इन बीएलओ की तैनाती पूरे एक महीने, 4 दिसंबर तक के लिए कर दी गई है. जिसके कारण एक महीने तक स्कूल शिक्षा व्यवस्था और इसकी गति दोनों ही कछुए की चाल में रहेंगीं। हालांकि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के स्कूलों के लिए दिला द्वारा पत्र लिखकर शिक्षकों की वापसी की गुहार तो लगाई गई है. लेकिन अभी कुछ तय नहीं हुआ है. इस वोटर लिस्ट की गिनती में जिले के छात्र पिसने वाले हैं. जिनकी न तो वोट देने की उम्र है और न ही अधिकार। इनकी शिक्षा के साथ ये खिलवाड़ करना प्रशासन की लापरवाही कही जाये या फिर अनदेखी। फ़िलहाल जानकारी के अनुसार इन शिक्षकों की ड्यूटी केवल स्कूल के पहले और स्कूल के समय के बाद के लिये ही लगाई गई है. लेकिन शिक्षकों के अनुसार उन्हें स्कूल के समय में भी इन कार्यों को करना पड़ रहा है. जो कि छात्रों के हित के लिए ठीक नहीं है. वो भी ऐसे समय में जब छात्रों की बोर्ड की परीक्षा को इतने कम समय बचें हों.
इनका कहना है
एसआईआर का कार्य भी एक राष्ट्रीय कार्य है. इसमें शिक्षकों ड्यूटी लगने से छात्रों की स्कूली शिक्षा तो प्रभावित हो रही है. इसीलिए हमने डीपीआई और कलेक्ट्रेट में पत्र भी लिखा है कि हाइस्कूल और इंटरमीडिएट के शिक्षकों की वापसी करायी जाए. जिससे स्कूलों का सञ्चालन और शिक्षा व्यवस्था दोनों ठीक हो सके.
नरेंद्र कुमार अहिरवार, जिला शिक्षा अधिकारी, भोपाल
