
ग्वालियर,। उपनगर मुरार की सड़कों पर आज धर्म एवं संस्कृति का अदभुत समां बना। सुमधुर भजन प्रस्तुत कर रहे बैंड बाजों की सुमधुर धुनों एवं ढोल ताशे की लय पर मनोरम नृत्य करते श्रद्धालु महिला पुरुष, घरों से की जा रही पुष्पवर्षा, मध्य में चल रहे चांदी के सजे धजे भव्य रथ पर विराजे भगवान पार्श्वनाथ स्वामी और मार्ग में जगह जगह रथयात्रा को रोककर प्रभु की आरती कर पुण्य बटोरने के लिए धर्मप्रेमीजन की स्पर्धा। ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे साक्षात स्वर्ग उपनगर मुरार की सड़कों पर उमड़ आया है।अवसर था मुरार जैन धर्मशाला में विगत आठ दिन से चल रहे सिद्धचक्र महांडल विधान के समापन पर निकाली गई भव्य शोभायात्रा का।
मुरार दिगंबर जैन मंदिर के अध्यक्ष दिनेशचंद्र जैन ऐसावाले एवं ग्वालियर जैन समाज के मीडिया प्रभारी ललित जैन भारती ने जानकारी देते हुए बताया कि सुबह विश्व शांति महायज्ञ के साथ मंडल की पूर्णाहुति विधानाचार्य त्रिलोक तीर्थ, बड़ागांव के बा. ब्र. नवीन भैया द्वारा सम्पूर्ण विधि विधान के साथ दी गई। इसके उपरांत मूलनायक भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा रजत रथ में विराजित कर जयघोष के साथ विशाल रथयात्रा का शुभारंभ किया गया। श्रद्धालुगण अपने हाथों से रथ को खींचकर चल रहे थे। महिलाएं जुलूस में केसरिया साड़ी पहन कर चल रही थीं तो पुरुष वर्ग धोती दुपट्टा व सफेद वस्त्र पहनकर चला। रजत रथ में रवि कुमार जैन सुपावली वाले भगवान को लेकर बैठे। इस विशाल रथ यात्रा में उपनगर मुरार के विशिष्टजन एवं वरिष्ठ जनप्रतिनिधि भी शामिल हुए।
*पार्श्वनाथ भगवान को पुनः उनके मूल स्थान मंदिरजी में विराजा गया*
रथयात्रा उपनगर मुरार में चिक संतर, माल रोड, सराफा, सदर बाजार आदि प्रमुख मार्गों से होते हुए नगर भ्रमण कर पंचायती बड़ा जैन मंदिर पहुंची। यहां भगवान को पुनः उनके मूल स्थान पर विराजा गया। मंदिर में क्षमायाचना के साथ विसर्जन किया गया। रथ यात्रा में महिला मंडल सदस्य, युवा मंडल कार्यकर्ता व बाल मंडल के बालक-बालिकाएं व बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। मुरार जैन मंदिर के अध्यक्ष दिनेशचंद्र जैन ऐसावाले, मंत्री देवेंद्र जैन बड़े लाल, सुभाष जैन नेताजी, प्रदीप जैन पोली, नवीन जैन नमन, धर्मेंद्र पटेल, दिलीप नायक, प्रतीक जैन लालू आदि ने विधान आचार्य नवीन भैया त्रिलोक तीर्थ सहित संगीतकार भावना जैन, नाट्य निदेशक संजय शाह जैन, पुजारी मंडल, टैंट एवं साउंड सिस्टम, धर्मशाला स्टाफ आदि का स्वागत व सम्मान किया।
*सौधर्म इन्द्र, कुबेर एवं ईशान इंद्र ने हवन में मंगल कलशों को स्थापित किया*
अष्टांह्निका पर्व के समापन पर आठ दिनी श्री सिद्ध चक्र मंडल विधान के तहत दिगंबर जैन धर्मशाला के विशाल प्रांगण में इंद्र-इंद्राणियों व समाजजनों ने विश्व शांति के लिए हवन में आहुतियां देकर धर्म लाभ लिया। सौधर्म इन्द्र, कुबेर एवं ईशान इंद्र बने पात्रों ने हवन में मंगल कलशों को स्थापित किया एवं अखण्ड दीप प्रज्ज्वलन किया गया। इस महायज्ञ में नगर, प्रदेश व देश में विश्वशांति व सुख-समृद्धि के लिए कामना की गई।
*साध्वी आर्यिकाश्री को पिच्छिका, वस्त्र भेंट करने एवं चरण धोने के लिए धर्मप्रेमियों में दिखी स्पर्धा*
ग्वालियर जैन समाज के मीडिया प्रभारी ललित जैन भारती ने बताया कि इससे पूर्व जैन धर्मशाला प्रांगण में जैन साध्वी आर्यिका विजयंमती माताजी का पिच्छिका परिवर्तन समारोह भव्यता और श्रद्धा के साथ हुआ। विगत चार महीने से मुरार जैन मंदिर में चातुर्मास कर धर्म की गंगा बहाने वाली पूज्य गुरुमां का यह विशेष आयोजन ग्वालियर महानगर के जैन समाज के लिए गौरव का क्षण बना। कार्यक्रम की शुरुआत आचार्यश्री सन्मति सागर महाराज की पूजा और मंगलाचरण भाव नृत्य से हुई। इस अवसर पर सुमधुर भजनों ने भक्ति का वातावरण बना दिया। आर्यिका विजयमती माताजी ने अपनी मंगल देशना में कहा कि ग्वालियर शहर और विशेषकर मुरार धर्मनगरी है, जहां के लोग धर्मप्रेमी और संस्कृति के रक्षक हैं। यहां के श्रद्धालुओं ने जिस उत्साह और उमंग से धर्म प्रभावना की, वह प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में पिच्छिका का अत्यधिक महत्व है, क्योंकि यह जैन साधु-साध्वियों की पहचान है। इसके बिना साधु एक कदम भी नहीं बढ़ाते, क्योंकि यह जीवों की हिंसा से बचाव का माध्यम है। गुरुमां ने अपनी पुरानी पिच्छिका श्रीमती प्रियंका रजत जैन, अजीता को भेंट की। नवीन पिच्छिका भेंट करने का सौभाग्य भी इन्हें ही प्राप्त हुआ। इस अवसर पर चरण धोने का सुअवसर सुपावली परिवार को मिला, जबकि वस्त्र भेंट का सौभाग्य अशोक कुमार प्रिंस कुमार ऐसावालों ने प्राप्त किया।
*इन्हें मिला चातुर्मास के कलश पाने का सौभाग्य*
आर्यिकाश्री के चार माह तक चले चातुर्मास के समापन पर नगर भर से उमड़े श्रद्धालु “मुख्य कलश” एवं “द्वितीय कलश” प्राप्त करने के लिए उत्सुक दिखे। विजयमती माताजी के शुभाशीष से यह कलश शशिप्रभा जैन पत्नी केएल जैन एवं श्रीमती प्रमोद जैन, निशांत चेतराम जैन को प्राप्त हुआ। इससे पूर्व भोर की बेला में भगवान की शांतिधारा मैनासुंदरी बनीं कुसुमा महावीर प्रसाद जैन, भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार रविन्द्र जैन की ओर से की गई। प्रदीप कुमार मनेंद्र कुमार झम्मन परिवार ने चि. विनम जैन के जन्मदिन पर प्रथम शांतिधारा श्रद्धापूर्वक की गई।
