कांग्रेस: 2014 के बाद लगातार कमजोर किया गया सूचना का अधिकार कानून

भोपाल: सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम की 20वीं वर्षगांठ के अवसर पर मध्य प्रदेश कांग्रेस ने अपने प्रेस वार्ता आयोजित की। इसमें जिला कांग्रेस अध्यक्ष (शहर) प्रवीण सक्सेना, आरटीआई प्रकोष्ठ के अध्यक्ष पुनीत टंडन और प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता मिथुन अहिरवार उपस्थित रहे। नेताओं ने वर्ष 2005 में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार और श्रीमती सोनिया गांधी के दूरदर्शी नेतृत्व में बने इस ऐतिहासिक कानून के महत्व को याद किया।

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि सूचना का अधिकार अधिनियम यूपीए सरकार के अधिकार-आधारित शासन एजेंडा की पहली कड़ी था। इसी दौर में मनरेगा (2005), वन अधिकार अधिनियम (2006), शिक्षा का अधिकार (2009), भूमि अधिग्रहण अधिनियम (2013) और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (2013) जैसे ऐतिहासिक कानून भी लागू किए गए। आरटीआई कानून ने नागरिकों को सरकारी सूचनाओं तक पहुँच सुनिश्चित कर उन्हें सशक्त बनाया और शासन में पारदर्शिता व जवाबदेही को बढ़ावा दिया।
नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 के बाद से आरटीआई कानून को लगातार कमजोर किया जा रहा है।

वर्ष 2019 में किए गए संशोधनों से सूचना आयोगों की स्वायत्तता सीमित कर दी गई, जिससे केंद्र सरकार को आयुक्तों के कार्यकाल और सेवा शर्तें तय करने का अधिकार मिल गया। इसके अलावा, 2023 में पारित डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन अधिनियम ने “व्यक्तिगत जानकारी” की परिभाषा को इतना विस्तृत कर दिया कि अब जनहित में भी कई जानकारियाँ छिपाई जा सकती हैं।

कांग्रेस नेताओं ने सूचना आयोगों में लंबित मामलों और रिक्त पदों पर गहरी चिंता व्यक्त की, बताते हुए कि देशभर में 4 लाख से अधिक अपीलें लंबित हैं। उन्होंने आरटीआई कार्यकर्ताओं जैसे भोपाल की शहला मसूद और सतीश शेठी पर हुए हमलों का भी उल्लेख किया और कहा कि व्हिसलब्लोअर प्रोटेक्शन एक्ट अब तक लागू नहीं हुआ है।
कांग्रेस ने माँग की कि सूचना आयोगों की स्वायत्तता बहाल की जाए, डीपीडीपी अधिनियम की प्रतिबंधात्मक धाराओं की समीक्षा की जाए, सभी रिक्तियाँ शीघ्र भरी जाएँ, आयोगों की कार्यक्षमता पर सार्वजनिक रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जाए और व्हिसलब्लोअर्स को कानूनी सुरक्षा प्रदान की जाए।कांग्रेस ने कहा, “आरटीआई केवल एक कानून नहीं, बल्कि नागरिक सशक्तिकरण की आधारशिला है।” पार्टी ने जनता के सवाल पूछने और जवाब मांगने के अधिकार की रक्षा के अपने संकल्प को दोहराया।

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