48 दीपों से हुई भक्तामर दीप महाअर्चना में उतारी भगवान की आरती

ग्वालियर। अष्टानिका पर्व पर उपनगर मुरार स्थित जैन धर्मशाला में भव्य धार्मिक अनुष्ठान हो रहा है। यहां चल रहे श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान में सैकड़ों श्रद्धालुओ ने आज मंगलवार को श्रद्धा, भक्ति एवं आस्थाभाव में डूबकर सिद्ध भगवान की आराधना की। विधान में सुसज्जित किए गए आकर्षक मांडना पर सुबह से ही धार्मिक कार्यक्रम एवं अर्घ्य शुरू हो गए जो दोपहर बाद तक जारी रहे। इस मौके पर मूलनायक पार्श्वनाथ की शांतिधारा की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान जिनेंद्र की भक्ति में संगीतमय प्रस्तुतियों के साथ भजन गाए। पूजा अर्चना त्रिलोक तीर्थ बड़ागांव के ब्र. नवीन भैया के निर्देशन में हुए। गुरुवार, 6 नवंबर को इस विधान का समापन होगा। इस मौके पर शोभायात्रा निकाली जाएगी और विश्वशांति महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा।

मुरार जैन मंदिर कमेटी के अध्यक्ष दिनेशचंद्र जैन ऐसावाले एवं ग्वालियर जैन समाज के मीडिया प्रभारी ललित जैन भारती ने जानकारी देते हुए बताया कि सिद्धचक्र महामंडल विधान के आज सातवें दिन इंद्र इंद्राणियों ने 512 अर्घ्य समर्पित किए। इसके पूर्व सुबह मंदिर में भगवान का अभिषेक, शांतिधारा हुई और जगत की कामना के लिए प्रार्थना हुई। आज शांतिधारा का सौभाग्य ईशान इंद्र बने मुकेशकुमार दिव्याम कुमार अमनकुमार जैन एवं विधायक प्रतिनिधि प्रतीक जैन लालू को मिला। इस दौरान आर्यिका श्री विजयमती माताजी के प्रवचन भी हुए। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित आरोग्यधाम के ट्रस्टी विष्णु जैन सर्राफ, गोपाचल न्यास के महामंत्री अजीत बरैया एवं संजय गोल्ड के सुमतचंद्र जैन ने आर्यिकाश्री को श्रीफल भेंटकर आशीर्वाद ग्रहण किया। अतिथिगण को मोतीमाला पहनाकर एवं अलंकरण पट्टिका भेंटकर सम्मानित किया गया। इन सभी कार्यक्रमों में मुरार जैन मंदिर कमेटी के अध्यक्ष दिनेशचंद्र जैन ऐसावाले, मंत्री देवेन्द्र जैन बड़े लाल, सुभाष जैन नेताजी, प्रदीप जैन पोली, अशोक कुमार पोली, मनेंद्र जैन, दिनेश जैन प्रधान, राकेश जैन चप्पे, धर्मेन्द्र जैन पटेल, अनिल जैन बॉस, महेश जैन, नवीन जैन नमन, प्रतीक जैन लालू, उपेंद्र जैन ऐसावाले सहित सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओ की श्रद्धापूर्ण भागीदारी रही।

शाम को महाआरती से पहले उपनगर मुरार के समाजबंधुओं ने भगवान आदिनाथ की मूलनायक प्रतिमा के सम्मुख 48 श्लोकों के साथ भक्तामर दीप महाअर्चना की। विधानाचार्य नवीन भैया ने बताया कि इस स्तोत्र में अपार शक्तियों का भंडार है। इसमें हम भगवान आदिनाथ की महिमा और गुणों का वर्णन करते हैं। इस अवसर पर संस्कृत के 48 श्लोक बोले गए। दीपकों को रिद्धि सिद्धि मंत्रों के साथ स्वास्तिक मांडल पर रखा गया। भक्तामर दीप महाअर्चना ने आयोजन स्थल पर स्वर्गिक दृश्य निर्मित कर दिया। इसके उपरांत सामूहिक महाआरती की गई।

*”स्वार्थ का संसार” नाटक के मंचन ने दर्शकों को किया प्रभावित*

रात्रि में सांस्कृतिक संध्या के दौरान संजय शाह जैन, टीकमगढ़ के निर्देशन एवं भावना जैन, जबलपुर के संगीत संयोजन में “स्वार्थ का संसार” नाटक का मंचन किया गया। नाटक में दिखाया गया कि किस प्रकार “स्वार्थ के संसार” से सेठ जी का मन टूट जाता है। इस नाटक के माध्यम से सामाजिक जीवन में व्याप्त स्वार्थपरता पर प्रकाश डाला गया, जिसने दर्शकों को गहराई तक प्रभावित किया। इसी क्रम में कल बुधवार, 5 नवंबर को सायं 7 बजे से जैन धर्मशाला, मुरार में प्रख्यात नाट्यकर्मी अरविंद जैन के निर्देशन में “नेमी राजुल” नाटक का मंचन होगा। इससे पूर्व कल बुधवार को सुबह 6.30 बजे से पूजन, अभिषेक, शांतिधारा एवं माताजी के प्रवचन आदि कार्यक्रम होंगे।

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