कुलगुरू से नजदीकियों पर क्या भारी पड़ेगी कर्मचारियों की एकजुटता…?

महाकौशल की डायरी

अविनाश दीक्षित

जबलपुर के रानीदुर्गावती विश्वविद्यालय में कर्मचारी संघ अध्यक्ष वीरेंद्र पटैल को पद से हटाने के लिए कर्मचारियों द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को लेकर अब आर-पार की लड़ाई शुरू हो चुकी है। इसी गरमा-गरमी के बीच ये भी चर्चाएं तेज हैं कि वर्तमान अध्यक्ष वीरेंद्र पटैल की कुलगुरू से काफी नजदीकियां हैं, ऐसे में कयास लगाये जा रहे हैं कि अध्यक्ष को हटाना कर्मचारियों के लिए आसान नहीं होगा। गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से अध्यक्ष के खिलाफ मोर्चा खोल कर बैठे आरडीयू कर्मचारी संघ उपाध्यक्ष, महासचिव सहित अन्य कर्मचारियों ने कुलगुरू को अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करके आमसभा बुलाने की अनुमति दिए जाने को लेकर एक पत्र भी सौंपा है।

उक्त पत्र में 21 अक्टूबर तक निर्वाचन अधिकारी नियुक्ति किए जाने की मांग की गई थी लेकिन अब दीपावली भी गुजर चुकी है, तय तारीख भी गुजर चुकी है लेकिन एक्शन कुछ नहीं हुआ, जिससे आरडीयू कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त होता जा रहा है। ये भी स्पष्ट है कि निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति बिना कुलगुरू की सहमति के नहीं होगी। लिहाजा यह देखना होगा कि विश्वविद्यालय प्रशासन व कुलगुरु प्रो. राजेश वर्मा कर्मचारियों को किस तरह से संभालते हैं क्योंकि आरडीयू कर्मचारी संघ के वर्तमान अध्यक्ष वीरेंद्र पटैल के खिलाफ काफी कर्मचारी लामबंद हो चुके हैं।

मामला 20 सूत्रीय मांगों को लेकर कर्मचारी संघ द्वारा सितंबर माह में किए जा रहे आंदोलन से जुड़ा था जिसके बीच कर्मचारी संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र पटैल ने विवि प्रशासन को पत्र सौंप हड़ताल को बीच में ही स्थगित करने का ऐलान कर दिया। बस फिर क्या था, संघ के अन्य कर्मचारियों का कहना था कि अध्यक्ष ने उनसे रायशुमारी नहीं की जिसके बाद कर्मचारियों ने अध्यक्ष का विरोध करना शुरू कर दिया था। ये विरोध इसलिए भी खास बन गया क्योंकि रानीदुर्गावती विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के 57 साल के इतिहास में आज तक किसी अध्यक्ष को हटाने कर्मचारियों ने ऐसा विरोध जताया हो। जानकारों की माने तो आगामी कुछ दिनों में रानीदुर्गावती विश्वविद्यालय जंग का अखाड़ा नजर आने वाला है क्योंकि जो हालात अभी दिखाई दे रहे हैं उससे तो यही नजर आ रहा है। कर्मचारियों ने वर्तमान अध्यक्ष के खिलाफ विश्वासघात का भी आरोप लगाया है।

प्रदर्शन पर सुनना पड़ी खरी-खोटी..

जबलपुर के मनमोहन नगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में घटित हुई हृदय-विदारक घटना में नगर कांग्रेस ने कुछ ऐसा कारनामा किया जिसकी चर्चा शहर के साथ भोपाल के दिग्गज कांग्रेसियों के खेमे तक जा पहुंची..हुआ यूं कि 2 सगे मासूम भाईयों की स्वास्थ्य केंद्र के सैप्टिक टैंक में डूबने से हुई मौतों पर पहले तो कांग्रेसियों ने नगर निगम व स्वास्थ्य विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल प्रभारी अंशुल शुक्ला को निलंबित किए जाने की मांग को लेकर जबर्दस्त विरोध प्रदर्शन किया, भीड़ भी जमकर जुटाई गई और सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा पर दबाव बनाते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी अधिकारी अंशुल शुक्ला को हटाने लामबंद हुए। जिसके बाद सीएमएचओ ने आदेश जारी कर अंशुल शुक्ला को सीएमएचओ कार्यालय अटैच कर दिया।

इसी बीच नगर कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेताओं के फोन प्रदर्शन कर रहे कांग्रेसियों के मोबाइल पर बजे और फिर जो हुआ वो काफी चौंकाने वाला रहा.. मोबाइल पर कांग्रेसियों के दिग्गजों ने प्रदर्शनकारी कांग्रेसियों को जमकर फटकार लगाई और कहा कि तुम लोग अपने ही लोगों के खिलाफ मोर्चा क्यों खोल रहे हो, तत्काल प्रदर्शन बंद करो। ये इसलिए क्योंकि मनमोहन नगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी अधिकारी अंशुल शुक्ला कांग्रेस ही के पूर्व महापौर के करीबी रिश्तेदार थे। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और सीएमएचओ ने अंशुल शुक्ला को सीएमएचओ कार्यालय में अटैच कर दिया था। कांग्रेस का शहर में ये पहला ऐसा मौका था जब किसी अधिकारी को हटाने, निलंबित कराने की जिद पर अड़े होने के बाद खुद कांग्रेसियों ने उसी अधिकारी को बचाने सिफारिश की हो और पार्टी के दिग्गजों से खूब खरी-खोटी सुनी भी हो।

लीपापोती करने में खुद उलझे सीएमएचओ….

इधर सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा भी पूरी घटना को लेकर लीपापोती करते नजर आए और खुद अपने ही जवाबों में फंसते नजर आए। सीएमएचओ के जारी बयान के मुताबिक मनमोहन नगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 10 लोहे के ढक्कन चोरी हो चुके हैं. लेकिन हैरानी होती है ये जानकर कि एक भी चोरी की एफआईआर पुलिस थाना में रजिस्टर्ड नहीं कराई गई। इतना ही नहीं घटना घटित होने के बाद सीएमएचओ का ये कहना कि स्वास्थ्य विभाग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के खुले सैप्टिक टैंक में चीप रखने की व्यवस्था करने ही वाला था कि ये दर्दनाक घटना घटित हो गई। शहर में चर्चाएं हैं कि स्वास्थ्य विभाग होश में रहता, टैंक में ढक्कन लगे होते तो शायद वो दो मासूम बच्चों की जिंदगी अभी भी गुलजार रहती और उन्हें अपनी जान से हाथ नहीं धोना पड़ता।

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