
इंदौर:शहर के दिल कहे जाने वाले शास्त्री ब्रिज पर रविवार को एक बार फिर खतरे की घंटी बज गई. सुबह करीब 10 से 10.30 बजे के बीच गांधी प्रतिमा से शास्त्री मार्केट की ओर जाने वाली लेन पर पुल का एक हिस्सा अचानक धंस गया. करीब पांच फीट गहरा और छह फीट लंबा गड्ढा बन गया. इससे इस पुल के गिरने का खतरा बढ़ गया है. जानकारी मिलते ही ट्रैफिक पुलिस ने तत्काल बेरिकेड लगाकर वाहनों का रूट डायवर्ट कर दिया. गनीमत रही कि रविवार को ट्रैफिक सामान्य दिनों की तुलना में कम था, जिससे कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ.
ब्रिज में हुए गड्ढे की सूचना मिलने ही नगर निगम के अधिकारियों ने मरम्मत दल मौके पर भेजा और मलबा व मटेरियल डालकर गड्ढा भरवा दिया. भीतर का हिस्सा पूरी तरह खोखला हो चुका था और पुराने सरिए भी दिखाई देने लगे. निगम अधिकारियों का कहना है कि गड्ढे के नीचे की मिट्टी धंसने से यह स्थिति बनी, जिसे नियंत्रित कर लिया गया है. फिलहाल, संबंधित लेन पर यातायात आंशिक रूप से बंद है. सुरक्षा की दृष्टि से लोगों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी गई है. बहरहाल, मरम्मत के नाम पर खानापूर्ति कर दी गई है. नगर निगम और लोक निर्माण विभाग अब पूरे ब्रिज की जांच कराने की तैयारी में हैं.
इंजीनियरिंग टीम से रिपोर्ट मांगी गई है कि पुल की मजबूती और नींव की स्थिति क्या है. शास्त्री ब्रिज शहर के सबसे पुराने और व्यस्त पुलों में शामिल है. यह राजबाड़ा, सराफा, एमटीएच और एमजी रोड को जोड़ता है. रोजाना हजारों वाहन इस पुल से गुजरते हैं, लेकिन बढ़ती उम्र और लगातार भार के कारण पुल कई बार मरम्मत की मांग कर चुका है. वर्ष 2018 और 2022 में भी ब्रिज की जर्जर दीवारों में दरारें आने की शिकायतें दर्ज हुई थीं. इस ब्रिज की लंबे समय से मरम्मत की मांग उठ रही थी, लेकिन नगर निगम ने इस पर ध्यान नहीं दिया. ट्रैफिक रोके जाने के कारण वाहन चालकों को परेशानी भी हुई. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुल का स्ट्रक्चरल ऑडिट कर स्थायी मरम्मत की जरूरत है. ब्रिज के पास स्थित पेट्रोल पंप के कर्मचारी यतिन्द्र गर्ग का कहना है कि यह ब्रिज शहर की धडक¸न है, अगर इसकी देखरेख में लापरवाही रही तो बड़ा हादसा कभी भी हो सकता है.
चूहों के कुतरने से हो गया ब्रिज खोखला
नगर निगम जनकार्य प्रभारी राजेन्द्र राठौर ने बताया कि उक्त स्थान पर बड़ी संख्या में चूहे के घर हंै. चूहों ने उसे खोखला कर दिया है. चूहों के कुतरने से स्थान पोला हो गया है. इस वजह से मिट्टी धंस गई और गड्ढा हो गया. राठौर ने कहा कि पहले भी चूहों के कारण जगह खोखली हो गई थी और उसका ट्रीटमेंट किया था. अभी गड्ढा भर दिया है. कल जाकर देखूंगा और वहां चूहों का कंट्रोल पेस्ट कराकर सीमेंट कांक्रीट की फुटपाथ बना देंगे.
75 साल पुराना है शास्त्री ब्रिज
इंदौर शहर में आजादी के बाद सबसे पहले 1950 में शास्त्री रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण किया गया था. उस समय शहर की जनसंख्या 8 से 10 लाख के हिसाब से दो लेन का ब्रिज बनाया गया था. आज शहर की जनसंख्या 40 लाख को पार करके 4 गुना से भी ज्यादा हो गई है. शास्त्री रेलवे ओवर ब्रिज पर यातायात का दबाव भी बहुत ज्यादा हो गया है. अब स्थिति यह है कि दिन में एक दो बार ब्रिज पर यातायात जाम होना आम बात हो गई है. उक्त सबसे पुराने उम्रदराज ब्रिज को 4 लेन चौड़ा बनाने का प्रस्ताव है और चर्चा चल रही है. यह बात अलग है कि अभी तक नगर निगम इस पर कोई निर्णय नहीं कर सका है.
