भोपाल। मुनि श्री प्रमाण सागर महाराज ने कहा कि बाहर के साधन पाना आसान है, पर भीतर की शांति सबसे दुर्लभ लाभ है। वे झिरनों स्थित श्री दिगंबर जैन मंदिर में धर्मसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि भगवान की उपस्थिति का अनुभव हमारी श्रद्धा से होता है। मूर्ति नहीं, मूर्तिमान के दर्शन करें यही सम्यक् दर्शन है। मुनि श्री ने कहा कि झिरनों का यह मंदिर ऐसा दरबार है, जहां बैठते ही मन स्वतः प्रभु ध्यान में लीन हो जाता है। उन्होंने कहा कि भगवान की शरण में आने का अर्थ है उन्हें हृदय में विराजमान करना। गुरु भक्ति पर उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अर्जुन पास रहकर भी जो न पा सका, वह एकलव्य ने हृदय में गुरु को बसाकर पाया। कार्यक्रम का आयोजन जैन पंचायत चौक मंदिर, भोपाल द्वारा किया गया।
