
नई दिल्ली, 01 नवंबर (डिजिटल डेस्क): दुनियाभर में करोड़ों लोगों के मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझने के बीच, जापानी वैज्ञानिकों ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। ओसाका और कोबे विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने तनाव और अवसाद के लिए एक ऐसी नई वैक्सीन विकसित की है, जिसे ‘खुशियों वाली वैक्सीन’ कहा जा रहा है। वैज्ञानिकों का दावा है कि यह वैक्सीन मात्र दो महीने के भीतर ही लोगों में तनाव और अवसाद के लक्षणों को प्रभावी ढंग से कम कर सकती है। वर्तमान में उपलब्ध कई दवाइयाँ या तो सभी मरीजों पर असरदार नहीं होतीं या उनके गंभीर दुष्प्रभाव और लत लगने का खतरा होता है, जिसे यह नई वैक्सीन दूर कर सकती है।
वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह महत्वपूर्ण पीए-915 वैक्सीन एक विशिष्ट जैविक तंत्र पर काम करती है। यह वैक्सीन शरीर में पीएसीआईआईआई (PACIII) नामक रिसेप्टर को सफलतापूर्वक ब्लॉक कर देती है। यह रिसेप्टर सीधे तनाव और चिंता की शारीरिक प्रतिक्रिया से जुड़ा होता है। इस रिसेप्टर को निष्क्रिय करके, वैक्सीन शरीर की तनाव प्रतिक्रिया को नियंत्रित करती है, जिससे तनाव और अवसाद के स्तर में उल्लेखनीय कमी आती है। यह विशिष्ट तंत्र इसे पारंपरिक उपचारों की तुलना में एक बेहतर विकल्प बनाता है।
वैज्ञानिकों ने इस वैक्सीन की प्रभावशीलता का सफल परीक्षण चूहों पर किया। विभिन्न तरीकों से तनावग्रस्त किए गए चूहों को जब पीए-915 की एक खुराक दी गई, तो उनमें तनाव और अवसाद का स्तर उल्लेखनीय रूप से कम हो गया और उनका व्यवहार सामान्य हो गया। सबसे उत्साहजनक परिणाम यह रहा कि वैक्सीन की सिर्फ एक खुराक का असर आठ हफ्ते (दो महीने) तक बना रहा। परीक्षण में किसी भी तरह की लत या दिमागी नुकसान के लक्षण नहीं मिले। वैज्ञानिकों ने अब घोषणा की है कि जल्द ही इंसानों पर भी इस सुरक्षित और प्रभावी वैक्सीन का परीक्षण शुरू किया जाएगा, जिससे मानसिक स्वास्थ्य उपचार के क्षेत्र में एक गेम-चेंजर आने की उम्मीद है।
