जबलपुर: जिले में धान मिलिंग को लेकर एक बार फिर असमंजस की स्थिति निर्मित हो चुकी है। विगत माह में धान की मिलिंग ना हो पाने के कारण इसकी तिथि को 31 अक्टूबर तक बढ़ा दिया था, लेकिन उसके बाद भी जिले में लगभग 16 लाख क्विंटल धान वेयरहाउस में रखी हुई है, जिसकी मिलिंग नहीं हो पाई है। अब अगर धान की मिलिंग नहीं होती है तो शासन को काफी नुकसान होगा।
यदि फिर से मिलिंग की तारीख आगे नहीं बढ़ती है तो फिर कुछ समय बाद इस धान की नीलामी करनी होगी, जिसमें शासन को कम से कम 1000 प्रति क्विंटल के हिसाब से लगभग 160 करोड़ का नुकसान हो सकता है। विदित है कि जिला प्रशासन द्वारा इस वर्ष धान गड़बड़ी के मामले को लेकर पिछले कई माह से लगातार जांच की जा रही है। जिसके चलते जिले में धान की मिलिंग इस बार लगभग 50 प्रतिशत से भी कम हो से पाई है और शेष स्टॉक गोदाम में पड़ा हुआ से है।
मिलरों का आरोप, नहीं कट रहे आरओ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ मिलरों ने आरोप लगाए हैं कि नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा आरओ नहीं काटे जा रहे हैं। जिसके कारण वह मिलिंग नहीं कर पाए, आरओ नहीं कटने से वेयरहाउस से भी धान का उठाव नहीं हुआ है।अधिकारियों का कहना है कि जिन मिलरों के ऊपर एफआईआर दर्ज है, उन्हें मिलिंग से दूर रखा है, जबकि मिलर का कहना है कि कोर्ट से उनको स्टे मिल चुका है, इसके बाद भी उन्हें मिलिंग नहीं करने दी जा रही है।
दो माह में हो पाई 1 लाख क्विंटल की मिलिंग
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस वर्ष जिले में लगभग 38 लाख क्विंटल धान की खरीद हुई थी, जिसमें से लगभग 12 लाख क्विंटल धान उपार्जन केंद्रों से ही राइस मिलरों ने उठा ली थी और उसके बाद शेष धान में से लगभग 9 लाख क्विंटल की मिलिंग 6 माह में हो पाई थी। गौरतलब है कि अगस्त में तिथि बढ़ने के बाद 2 माह में मात्र 1 लाख क्विंटल धान की मिलिंग हो पाई है, जिसके बाद अब 16 लाख क्विंटल गोदाम में खराब हो रही है। पिछले वर्ष जिले में 48 लाख क्विंटल धान की खरीदी हुई थी, जिसमें 100 प्रतिशत मिलिंग हो गई थी और स्टॉक नहीं बचा था।
इनका कहना है
लगभग 16 लाख क्विंटल धान की मिलिंग होना बाकी है, शासन की ओर से इसकी तिथि बढ़ाई जा सकती है। धान की नीलामी होगी या नहीं ये फैसला उच्च अधिकारियों का है।
ऋषभ जैन, जिला प्रबंधक (नागरिक आपूर्ति निगम)
