नयी दिल्ली, 24 मार्च (वार्ता) मुख्य रूप से लोहा-इस्पात, एल्युमीनियम तथा तांबे और इनके उत्पादों के निर्यात में गिरावट के कारण कारण भारत के इंजीनियरिंग वस्तुओं के निर्यात में लगातार नौ माह की तेजी का सिलसिला इस बार फरवरी में टूट गया और कुल इंजीनियरिंग निर्यात में सालाना आधार पर 8.62 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी।
इंजीनियरिंग निर्यात पिछले वर्ष फरवरी के 9.94 अरब डॉलर के मुकाबले इस बार फरवरी में 9.08 अरब डॉलर रहा। फरवरी 2025 में एल्युमीनियम और उत्पादों के निर्यात में 58 प्रतिशत की और लोहे और इस्पात के निर्यात में 40 प्रतिशतकी भारी गिरावट देखी गयी।
इंजीनियरिंग निर्यात संवर्धन परिषद की एक रिपोर्ट के अनुसार अप्रैल 2024 के बाद से इंजीनियरिंग वस्तुओं के मासिक निर्यात में यह पहली गिरावट है।
चालू वित्त वर्ष 2024-25 में अप्रैल-फरवरी अवधि के दौरान इंजीनियरिंग वस्तुओं का निर्यात 105.85 अरब डॉलर रहा जो सालाना आधार पर 7.97 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में निर्यात 98.03 अरब डालर था।
ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन पंकज चड्ढा ने कहा,“फरवरी 2025 के दौरान ‘जहाजों, नावों और तैरती अवसंरचनाओं ‘ और ‘विमान, अंतरिक्ष यान और उनके कल-पुर्जों ‘ के निर्यात में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई।”
फरवरी 2025 में भारतीय इंजीनियरिंग वस्तुओं के लिए अमेरिका शीर्ष बाजार बना रहा, उसके बाद संयुक्त अरब अमीरात ( यूएई) और सऊदी अरब का स्थान रहा। आलोच्य माह में फ्रांस (67 प्र.श.), यूएई (37.9 प्र.श.) और ब्रिटेन (31.9 प्र.श.) को इंजीनियरिंग निर्यात में बसे अधिक वृद्धि देखी गई।
अमेरिका को इंजीनियरिंग सामान का निर्यात इस वर्ष फरवरी मे साल-दर-साल 5.8 प्रतिशत बढ़कर 1.66 अरब डॉलर हो गया और चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-फरवरी अवधि के दौरान यह 8.3 प्रतिशत बढ़कर 17.27 अरब डॉलर हो गया। इससे पिछले साल साल इसी अवधि में निर्यात 15.95 अरब डॉलर था। फरवरी 2025 में चीन को इंजीनियरिंग निर्यात साल-दर-साल 11.9 प्रतिशत गिरकर 20.75 करोड़ डॉलर रहा पर इस अवधि के दौरान रूस को इंजीनियरिंग निर्यात में भी गिरावट आई।
ईईपीसी इंडिया के चेयरमैन ने कहा,“2024-25 के फरवरी और मार्च के महीनों में वैश्विक व्यापार में बड़ी उथल-पुथल देखी गई – जो नवनिर्वाचित अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अपनाए गए सुरक्षात्मक और जवाबी प्रशुल्क लगाने की कार्रवाई का परिणाम है। ट्रंप प्रशासन ने चीन, कनाडा और मैक्सिको सहित अपने कुछ प्रमुख व्यापार भागीदारों पर प्रतिशोधात्मक टैरिफ लगाने की धमकी दी है। भारत भी इससे अछूता नहीं रहा है क्योंकि राष्ट्रपति ने भारत को “उच्च प्रशुल्क लगाने वाला देश” कहा है। अमेरिकी की जवाबी प्रशुल्क कार्रवाइयां दो अप्रैल से प्रभावी होने वाली हैं।”
श्री चड्ढा ने निर्यात गंतव्यों में विविधता लाने की आवश्यकता पर जोर दिया और साथ ही अमेरिका के साथ एक समझौते पर काम करने की भी बात कही जो चल रहे टैरिफ युद्ध के प्रभाव को कम कर सके।
श्री चड्ढा ने कहा,“भारत सरकार पहले से ही व्यापार विविधीकरण के मामले में सही दिशा में आगे बढ़ रही है। सरकार ने यूएई, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय मुक्त व्यापार क्षेत्र (ईएफटीए) के साथ नए एफटीए पर हस्ताक्षर किए हैं। यूरोपीय संघ, यूके, जीसीसी और पेरू के साथ भी नए एफटीए पर बातचीत की जा रही है।”
उन्होंने कहा,“लैटिन अमेरिका और अफ्रीका में ऐसे और एफटीए की आवश्यकता है। साथ ही, अमेरिका में अपने बाजार की सुरक्षा के लिए, भारत सरकार अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर भी विचार कर रही है। यह भी एक महत्वपूर्ण कदम है और हमें उम्मीद है कि अगर इसे लागू किया जाता है, तो यह हमारे वैश्विक बाजारों की सुरक्षा में एक लंबा रास्ता तय करेगा।”
वाणिज्य विभाग के त्वरित अनुमान के अनुसार, भारत के कुल वाणिज्यिक निर्यात में इंजीनियरिंग वस्तुओं की हिस्सेदारी जनवरी 2025 में 25.86 प्रतिशत थी और उसकी तुलना में फरवरी 2025 में यह हिस्सा 24.61 प्रतिशत रहा। संचयी आधार पर, अप्रैल-फरवरी 2024-25 के दौरान कुल वाणिज्यिक निर्यात में इंजीनियरिंग वस्तुओं की हिस्सेदारी 26.75 प्रतिशत रही।
