पीडब्ल्यूडी में संदिग्ध भुगतान का मामला, एसडीओ के पत्र से मचा हड़कंप

रीवा: लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में संदिग्ध भुगतान का मामला सामने आया है। विभाग के उपसंभाग क्रमांक-1 के अनुविभागीय अधिकारी (एसडीओ) ने कार्यपालन यंत्री को एक पत्र लिखकर कुछ संविदाकारों द्वारा माप पुस्तिकाओं में फर्जी हस्ताक्षर कर देयक भुगतान कराने की जानकारी दी है. यह पत्र विभागीय गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है और इससे अधिकारियों में हड़कंप मच गया है.

सूत्रों के अनुसार, यह पत्र 28 अक्टूबर को जारी किया गया है, जिसमें एसडीओ ओंकारनाथ मिश्रा ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि उपसंभाग के अधीन कुछ संविदाकारों द्वारा एसडीओ और उपयंत्रियों के नाम से फर्जी हस्ताक्षर करते हुए भुगतान कराने की जानकारी प्राप्त हुई है. पत्र में यह भी कहा गया है कि भविष्य में इस तरह के फर्जी भुगतानों की कोशिश की जा सकती है, इसलिए केवल सत्यापित देयकों पर ही भुगतान किया जाए.
बायपास सड़कों के निर्माण में भी उठे सवाल
सूत्रों का कहना है कि बायपास सड़कों के निर्माण से संबंधित कुछ कार्यों में भी अनियमितताओं की आशंका जताई जा रही है. बताया जा रहा है कि कुछ कार्यों में निविदा जारी होने के बावजूद कार्य पूरे नहीं हुए, फिर भी भुगतान किए जाने की शिकायतें हैं। इस संबंध में विभागीय स्तर पर जांच की संभावना व्यक्त की जा रही है.
टेबल टेंडर को लेकर भी चर्चाएं
विभागीय सूत्रों ने यह भी जानकारी दी कि पूर्व में कई छोटे कार्य टेबल टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से दिए गए थे. इनमें कुछ कार्यों के मौके पर निष्पादित न होने की शिकायतें सामने आई हैं. सूत्रों का कहना है कि अगर इन टेंडरों की गहराई से जांच की जाए तो कई तथ्यों का खुलासा हो सकता है.
अधिकारियों के बयान
कार्यपालन यंत्री नितिन पटेल ने बताया कि एसडीओ का पत्र अभी मेरे संज्ञान में नहीं आया है, लेकिन एक संविदाकार के मामले में फर्जी हस्ताक्षर की बात सामने आई है. इसकी जांच की जा रही है.
वहीं अनुविभागीय अधिकारी ओंकारनाथ मिश्रा ने कहा कि कुछ प्रारंभिक जानकारियां मिली थीं कि फर्जी हस्ताक्षर से देयक भुगतान कराने की कोशिश की जा रही है. इसीलिए यह पत्र लिखा गया ताकि भविष्य में केवल सत्यापित देयकों पर ही भुगतान किया जाए.
जांच की जरूरत
इस पूरे प्रकरण ने लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब यह जांच का विषय है कि फर्जी हस्ताक्षर से कितनी राशि का भुगतान हुआ और इसमें किन अधिकारियों व संविदाकारों की भूमिका रही.

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