गाजा में युद्धविराम का फिर टूटना

मध्य पूर्व का हाल फिर से चिंताजनक हो गया है. गाजा में जो युद्धविराम हुआ था, वह टूट गया है और इज़रायल और हमास एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं. यह घटना इस इलाके की अस्थिरता को साफ दिखाती है और यह भी बताती है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति अपनी सीमाओं पर है. इज़रायल का कहना है कि हमास ने उनके सैनिकों पर हमला किया, जिसके जवाब में उन्होंने जवाबी कार्रवाई की. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे बड़ा हमला बताया और साफ कर दिया कि देश अपनी सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाएगा. दूसरी ओर, हमास ने इस आरोप से इनकार किया और कहा कि इज़रायल ने ही पहले युद्धविराम तोड़ा.

इस आरोप-प्रत्यारोप से केवल हिंसा बढ़ती है. जब दोनों पक्ष खुद को सही मानकर दूसरे पर दोष लगाते हैं, तो बातचीत और भरोसा बनना मुश्किल हो जाता है. यह दिखाता है कि युद्धविराम सिर्फ हथियारों की शांति है, लेकिन असली समस्या अभी भी बनी हुई है.

दरअसल, यह युद्धविराम शुरू से ही कमजोर था. यह किसी स्थायी शांति का उपाय नहीं था, बल्कि बंधकों के आदान-प्रदान और कुछ मानवीय मदद तक सीमित था. ऐसे समझौते छोटी-छोटी घटनाओं से टूट जाते हैं. जब तक गाजा की घेराबंदी, फिलिस्तीनी राज्य की मान्यता और हमास के मुद्दों का राजनीतिक समाधान नहीं निकलेगा, तब तक हर बार युद्धविराम के बाद फिर जंग होगी.

अमेरिका और बाकी दुनिया के लिए भी यह मुश्किल भरा समय है. बार-बार युद्धविराम टूटने से उनकी विश्वसनीयता पर असर पड़ता है और यह दिखता है कि वे इस क्षेत्र में निर्णायक भूमिका नहीं निभा पा रहे हैं. अगर कूटनीति सिर्फ समय खरीदने का जरिया बन जाए, तो स्थायी शांति हासिल नहीं हो सकती.

गाजा के लोग में सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं बच्चे, महिलाएं और परिवार जो किसी भी पक्ष के नहीं हैं, वे सबसे ज्यादा दुख सहते हैं. उनकी समस्या केवल आंकड़ों में दिखती है, लेकिन वास्तविकता में ये एक बड़ी मानव त्रासदी है.

गाजा का यह संघर्ष साफ करता है कि हथियारों से शांति नहीं आ सकती. बम और मिसाइल सीमाएं बदल सकते हैं, लेकिन दिलों में मौजूद नफरत खत्म नहीं होती. जब तक दोनों पक्ष भरोसा नहीं करेंगे और खुलकर बात नहीं करेंगे, तब तक हर युद्धविराम बस एक छोटा विराम ही रहेगा.अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब केवल अस्थायी समाधान से काम नहीं चलाना चाहिए. उन्हें एक स्थायी राजनीतिक समाधान के लिए दबाव बनाना होगा, जिसमें सुरक्षा, सम्मान और अपने फैसले खुद लेने का अधिकार बराबर हो. अन्यथा, गाजा की आग बुझने की बजाय बार-बार भडक़ेगी और शांति सिर्फ एक नाम के लिए ही रहेगी.

गाजा में हालिया हिंसा का पुनरुत्थान यह साबित करता है कि सैन्य समाधान से स्थायी शांति नहीं लाई जा सकती. जब तक संघर्षरत पक्ष एक-दूसरे पर भरोसा नहीं करेंगे और हिंसा की जड़ को संबोधित नहीं करेंगे, तब तक रक्तपात जारी रहेगा. यह समय है कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय, विशेष रूप से मध्यस्थ देश, केवल अस्थायी विरामों पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, एक व्यापक और स्थायी राजनीतिक समाधान के लिए दबाव बनाए. अन्यथा, गाजा में मानवीय संकट और इज़रायल-फिलिस्तीन संघर्ष की आग बुझने के बजाय बार-बार भडक़ती रहेगी.

 

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