
नई दिल्ली, 29 अक्टूबर 2025: आयकर विभाग की इंटेलिजेंस एंड क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन (आईएंडसीआई) विंग ने एक बड़ी कार्रवाई में 3 सहकारी बैंकों में लगभग ₹1,500 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेने-देन को उजागर किया है। यह बड़ा फर्जीवाड़ा 22,550 से अधिक खातों के जरिए किया गया है। इन तीन बैंकों में से दो बैंक नागपुर में स्थित हैं। विभाग का अनुमान है कि इन सहकारी बैंकों के माध्यम से करोड़ों रुपये के नकद जमा किए जा रहे थे, जिनका खुलासा बैंकों ने अपनी स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन्स (एसएफटी) रिपोर्ट में नहीं किया था।
जांच में यह सामने आया है कि बैंकों ने सबसे अधिक जानकारी ‘वर्ष में 2 लाख से अधिक का ब्याज देने’ से संबंधित मामलों में छिपाई थी। इन तीन बैंकों में ही ब्याज से जुड़े 20,000 से अधिक मामले पाए गए हैं, जिनमें कई बार करोड़ों रुपये से अधिक का ब्याज भुगतान किया गया था, लेकिन बैंक ने उसकी जानकारी आयकर विभाग को नहीं दी। इसके अलावा, ₹50 लाख से अधिक की निकासी और जमा के भी 400 मामले सामने आए हैं। यह पैसा उन लोगों के खातों में जमा था, जिन्होंने इसे अपने टैक्स रिटर्न में नहीं दिखाया था।
जांच में पता चला कि बैंकों द्वारा एसएफटी (SFT) फॉर्म के तहत 50 लाख से ऊपर की जमा-निकासी (करंट अकाउंट में) और 10 लाख से अधिक जमा-निकासी (सेविंग अकाउंट में) की जानकारी देना जरूरी है, जिसका पालन नहीं किया गया। अब आयकर विभाग उन सभी जमाकर्ताओं से तेजी से पूछताछ करेगा, जिनके नाम पर यह पैसा जमा था। सूत्रों के अनुसार, विभाग जल्द ही अन्य सहकारी बैंकों के खिलाफ भी अभियान चलाएगा, क्योंकि लोगों द्वारा ‘अतिरिक्त आय’ छिपाने के लिए इन्हीं बैंकों का सहारा लिया जा रहा है।
