निगम में सत्ता और पैसे का खेल: वसूली, दबाव और पदस्थापना की राजनीति

इंदौर: पिछले दो तीन दिन से नगर निगम अधिकारियों और पार्षदों के बीच राजस्व राशि वसूलने को लेकर विवाद हो रहा है. वास्तविकता में इस तरह के झगड़े की मूल जड़ होती है अवैध वसूली!पार्षद अपने वार्डों में निगम अधिकारियों का उपयोग कर नोटिस भिजवाते हैं और फिर समझौते के नाम पर अवैध वसूली करते है. यहीं काम निगम के अधिकारी भी करते है, लेकिन निगम अधिकारी किसी की पहचान और नाम सामने आने पर लिहाज रख लेते है. इसके उलट पार्षद निगम अधिकारी पर डरा धमका और दबाव बनाकर रहवासी के खिलाफ कारवाई करवाने की जोर जबर्दस्ती करते है.

कार्रवाई नहीं करने पर निगम अधिकारियों को झोन से हटाने या अपनी पसंद के अधिकारियों को पदस्थ करवाने से पीछे नहीं हटते है. सबसे पहले बात ताजा विवाद वार्ड 74 की करते है. वार्ड 74 में बहुत अवैध हॉस्टल, बिल्डिंग, दुकानें और ट्रांसपोर्ट नगर सहित बड़ी व्यापारिक गतिविधियां होती है. उक्त वार्ड में आयुक्त के कहने पर एआरओ जीआईएस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर नप्ती करने पहुंचे थे.

जिस मकान की नप्ती करने पहुंचे थे, उसने नया निर्माण कर पुराने टैक्स से ज्यादा बनाने की बात कही जा रही है. बताया जा रहा है कि यहां के नेता कई हॉस्टल संचालकों से वसूली करते है. पूर्व में भी झोनल अधिकारी नागेंद्र भदौरिया को अवैध हॉस्टल तोड़ने के चलते हटवा दिया था. इसके पीछे की कहानी है जो सामने आई थी कि एक नेता ने ही निगम अधिकारी से अवैध निर्माण होने की जानकारी देकर नोटिस भिजवाए थे. बाद में हॉस्टल संचालकों से अवैध निर्माण नहीं तोड़ने की सुपारी ले ली थी. भदौरिया ने आयुक्त के संज्ञान में मामला ले जाकर लता अग्रवाल के साथ मिलकर अवैध हॉस्टल तोड़ने की कारवाई कर दी. इसके बाद शिकायत कर भदौरिया को हटवा दिया था.
अवैध निर्माण में करते हैं सहयोग

नेता और उनके समर्थक अवैध निर्माण को सहयोग करते है कि अपना आदमी है, अपने लोग हैं. अवैध निर्माण के बाद मालूम पढ़ता है कि उसमे पार्षद परिवार, रिश्तेदार और समर्थक की पार्टनरशिप है या उसमें कुछ हिस्सा अपने नाम करवा लिया. यह कार्रवाई पूरे शहर में चलती है. इसके पीछे वे बिल्डर्स और जमीन के धंधों से जुड़े लोग भी होते है, जो स्थानीय नेताओं को अप्रत्यक्ष रुप से आर्थिक सहायता और मदद करते है. इतना ही नहीं लालच भी देते है कि बिल्डिंग और भवन में इतना हिस्सा आपका या फिर एक दुकान, एक फ्लैट या कई बार आर्थिक कमजोर स्थानीय नेता नकद लेनदेन भी कर लेते है.
अप्रत्यक्ष रूप से बनाते हैं दबाव
नगर निगम में एक खेल और होता है, जिसमें स्थानीय नेताओं के चहेते ठेकेदारों को कम देने का निगम अधिकारियों पर अप्रत्यक्ष रुप से दबाव बनाया जाता है. इसमें स्थानीय नेता लोग ठेकेदारों के गिरोह से मिलकर सिंडिकेट चलाते है. नेता प्रतिपक्ष ने पिछले दिनों सड़क निर्माण में ठेकेदारों के गिरोह का पर्दाफाश किया था, जिसमें 40 करोड़ रुपए ज्यादा में चार कंपनियों को ही काम देने का प्रस्ताव हो गया था. बाद में उक्त कार्य के लिए तीन बार टेंडर हुए और करीब 20 करोड़ रुपए कम में सड़क निर्माण के ठेके हुए थे.
मुंह दिखाई करते हैं
कहने का तात्पर्य यह है कि पार्षद जनता को दिखाने के लिए मुंह दिखाई करते है, निगम अधिकारी पार्षद को दिखाने के लिए. कुल मिलाकर निगम अधिकारी और पार्षदों की जहां जुगलबंदी हो जाती है वहां कुछ मालूम नहीं पड़ता है. इसके उलट अधिकारी पार्षद हित में काम नहीं करें तो जो दो दिन पहले पार्षद पति ने किया , ऐसे दृश्य उत्पन्न होकर और विवाद होते हैं.

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