केरल में हृदय संबंधी समस्याएं मृत्यु का प्रमुख कारण

तिरुवनंतपुरम, 28 अक्टूबर (वार्ता) केरल में हृदय संबंधी बीमारियां मृत्यु का प्रमुख कारण बनकर उभरी हैं। कई अन्य देशों की तुलना में यहां मृत्यु दर चिंताजनक रूप से अधिक है।

हृदय रोग विज्ञान अकादमी के कार्यकारी सदस्य डॉ. नरेश पुरोहित के अनुसार सरकारी स्वास्थ्य आंकड़े बताते हैं कि राज्य में हर 100 में से 26 मौतें हृदय संबंधी समस्याओं के कारण होती हैं।

गौरतलब है कि 60 प्रतिशत पुरुष और 40 प्रतिशत महिला हृदय संबंधी मौतें 65 वर्ष की आयु से पहले होती हैं, जो अकाल मृत्यु के बढ़ते खतरे और परिवारों पर पड़ने वाले भारी वित्तीय बोझ को उजागर करती है।

उन्होंने बताया कि हृदय रोगों के कुल मामलों में महिलाओं की हिस्सेदारी 27 प्रतिशत है, जबकि पुरुषों की हिस्सेदारी 25.53 प्रतिशत है।

जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ और वरिष्ठ महामारी विज्ञानी ने चेतावनी दी कि जीवनशैली से जुड़ी और गैर-संचारी बीमारियाँ (जिनमें कैंसर, पुरानी फुफ्फुसीय बीमारियाँ, हृदय रोग, उच्च रक्तचाप और मधुमेह शामिल हैं) राज्य में एक बड़ी जन स्वास्थ्य चुनौती पेश करती हैं।

डॉ. पुरोहित ने कहा, “केरल की लगभग 20 प्रतिशत आबादी मधुमेह से पीड़ित है और इसलिए हृदय, गुर्दे, अग्नाशय और तंत्रिका संबंधी रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील है।”

उन्होंने कहा कि केरल संकट प्रबंधन में तो उत्कृष्ट है, लेकिन उसके पास दीर्घकालिक स्वास्थ्य रणनीति का अभाव है। उन्होंने कहा, “राज्य पश्चिमी स्तर के स्वास्थ्य संकेतकों का दावा करता है, लेकिन संक्रामक रोगों के उन्मूलन में अपनी उपलब्धियों की स्थिरता को नजरअंदाज कर रहा है।”

डॉ. पुरोहित ने आगे कहा कि केरल में हर 1,000 लोगों में से 180 लोग दीर्घकालिक बीमारियों से पीड़ित हैं, जो केवल महंगे सुपर-स्पेशलिटी उपचारों पर निर्भर रहने के बजाय निवारक और प्रोत्साहनकारी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को मजबूत करने की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित करता है।

उन्होंने आगे कहा, “इस दोहरी महामारी से निपटने के लिए केरल की स्वास्थ्य नीति में व्यापक बदलाव की आवश्यकता है ताकि केवल उपचार ही नहीं, बल्कि रोकथाम भी की जा सके।”

 

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