जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट में परिवहन सचिव मनीष सिंह को मप्र राज्य परिवहन प्राधिकरण (एसटीए) का चेयरमेन बनाये जाने को चुनौती दी गई है। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने मामले में मुख्य सचिव और स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के अध्यक्ष मनीष सिंह को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।
यह मामला शहडोल निवासी बस ऑपरेटर अजय नारायण पाठक की ओर से दायर किया गया है। जिसमें कहा गया है कि मनीष सिंह की नियुक्ति गजट नोटिफिकेशन द्वारा मार्च 2025 में स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के अध्यक्ष के रूप में की गई थी। आवेदक की ओर से कहा गया कि मनीष सिंह ने मध्य प्रदेश राज्य सडक़ परिवहन निगम के प्रबंध संचालक के पद पर रहते हुए स्वयं के नाम से नियुक्ति का गजट नोटिफिकेशन जारी किया था।
दलील भी दी गई कि मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 68 (2) के अनुसार स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के अध्यक्ष का पद कोई भी ऐसा कर्मचारी या प्राधिकारी धारण नहीं कर सकता जिसका राज्य सरकार द्वारा संचालित परिवहन उपक्रम में वित्तीय हित निहित हो। मनीष सिंह मध्य प्रदेश राज्य सडक़ परिवहन निगम के प्रबंध संचालक का दायित्व संभाल रहे थे, जिसमें राज्य सरकार का वित्तीय हित समाहित है।
इसके पश्चात अगस्त माह में मनीष सिंह की नियुक्ति मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा निगमित राज्य स्तरीय कंपनी मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं अधोसंरचना लिमिटेड कंपनी के प्रबंध संचालक के पद पर भी की गई, जिसका कार्य बसों के संचालन से संबंधित है। इस प्रकार मनीष सिंह मोटर व्हीकल अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत राज्य स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी के अध्यक्ष के रूप में कार्य करते रहे हैं जो कि असंवैधानिक है।
याचिका में मांग की गई कि इस पद पर रहते हुए जो भी आदेश जारी किए गए हैं, उन्हें निरस्त किया जाए। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आशीष त्रिवेदी, सुबोध पांडे व अपूर्व त्रिवेदी ने पक्ष रखा।
