
नई दिल्ली, 27 अक्टूबर 2025: ईरान इस समय दवा आपूर्ति संकट का सामना कर रहा है, जिससे मार्च तक देश में दवाओं के उत्पादन में रुकावट और गंभीर कमी की आशंका है। दवा उद्योग के विशेषज्ञ मोजतबा सरकंदी ने बताया कि इसका मुख्य कारण संयुक्त राष्ट्र द्वारा सितंबर में फिर से लगाए गए प्रतिबंध हैं, जिन्होंने विदेशी मुद्रा तक पहुँच और आपूर्ति श्रृंखला दोनों को प्रभावित किया है। बैंकिंग और बीमा पर लगी रोक की वजह से आयातक दवाओं का भुगतान और परिवहन नहीं कर पा रहे हैं, जबकि मानवीय वस्तुओं को छूट मिली हुई है।
सरकंदी के अनुसार, ईरान में लगभग 99% दवाएं घरेलू स्तर पर बनाई जाती हैं, लेकिन सक्रिय दवा तत्व (APIs) और जरूरी केमिकल कंपाउंड का आयात मुख्य रूप से चीन और भारत से होता है। अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों ने इन आवश्यक सामग्रियों तक पहुँच को मुश्किल बना दिया है। प्रतिबंधों के बाद शिपिंग और बीमा लागत 30-50 प्रतिशत तक बढ़ गई है, जिससे घरेलू निर्माता सीमित कच्चे माल के कारण उत्पादन कम कर रहे हैं।
दवा संकट का विशेष रूप से कैंसर और बायोटेक दवाओं पर गंभीर असर देखने को मिलेगा। मरीजों को इलाज में देरी का सामना करना पड़ रहा है या फिर उन्हें काले बाजार से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि विशेष भुगतान चैनल नहीं बनाए गए, तो दवाओं की कमी और गंभीर होगी। इन यूएन के प्रतिबंधों का ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है।
