
अनूपपुर। लोक आस्था के महापर्व डाला छठ की शुरुआत पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ अनूपपुर जिले में हो गई है। 25 अक्टूबर को व्रती महिलाओं ने खरना का व्रत रखकर छठ पर्व के दूसरे दिन की परंपराओं का निर्वहन किया। इस अवसर पर जिलेभर में मंत्रोच्चारण के साथ ध्वज पूजन और झंडा वंदन का आयोजन किया गया।
मडफा तालाब और तिपान नदी में ध्वज पूजन
छठ पूजा समिति अनूपपुर द्वारा मडफा तालाब एवं तिपान नदी तट पर छठी मैया के प्रतीक चिन्ह ध्वज (झंडा) की स्थापना की गई। इसी प्रकार जिले के अन्य 19 तालाबों और सरोवरों में भी श्रद्धापूर्वक छठी मैया के प्रतीक चिन्ह लगाए गए। सामतपुर स्थित पांडवकालीन शिव-मारुति मंदिर परिसर में शाम को ध्वज वंदन पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें पंडित केशव प्रसाद मिश्रा (चंदू महाराज) ने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा विधि सम्पन्न कराई। इस दौरान समिति संयोजक एडवोकेट अक्षयवट प्रसाद, कन्हैया लाल मिश्रा, रमेश सिंह, सुजीत मिश्रा, पंडित दिनेश मिश्रा, विजय सिंह राठौर, गणेश रौतेल, बृजेश राठौर, शिवांशु रंजन सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।
चार दिवसीय पर्व का पूरा कार्यक्रम
चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व की शुरुआत 25 अक्टूबर को नहाय-खाय से हुई। 26 अक्टूबर को खरना व्रत, 27 अक्टूबर को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया जाएगा, जबकि 28 अक्टूबर को उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन होगा। इस दौरान व्रती महिलाएं 36 घंटे का निर्जला उपवास रखती हैं और सूर्यदेव व छठी मैया की आराधना कर संतान की मंगलकामना और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
पुलिस अधीक्षक मोतिउर रहमान ने बताया कि जिले में 21 स्थानों पर छठ पूजा का आयोजन किया जाएगा। सभी स्थलों पर सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। मुख्य स्थलों में अनूपपुर में मडफा तालाब सामतपुर और तिपान नदी तट, चचाई क्षेत्र में छठकुंड भरगामा, धोबिया टंकी तालाब, कुदरा ओला तालाब, कोतमा में गणेश नगर केवी नदी घाट, बस स्टेशन तालाब, भालूमाड़ा में पारसी रोड छठ तालाब, बिजुरी में देवी तालाब सूर्य मंदिर, रामनगर में जोड़ा तालाब, शिव मंदिर तालाब, अमरकंटक में नर्मदा नदी रामघाट प्रमुख हैं। राज्य आपदा प्रबंधन केंद्र की टीम भी सुरक्षा व व्यवस्था के लिए तैनात रहेगी।
व्रती महिलाओं का कठिन निर्जला उपवास
27 अक्टूबर को व्रती महिलाएं भोर से निर्जला उपवास रखकर सूर्यास्त से पूर्व स्नान के बाद पूजा करेंगी। छठी मैया को रसियाव, खीर, रोटी, गुड़, दूध, केला और पारंपरिक व्यंजन ठेकुआ का भोग लगाया जाएगा। भोग के बाद महिलाएं खरना करेंगी और सुहागिनों को सदा सुहागन रहने का आशीर्वाद देंगी। संध्या समय व्रती महिलाएं गीत गाते हुए नदी या सरोवर के तट पर जाकर अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देंगी। अगले दिन प्रातः उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाएगा।
संतान प्राप्ति और मंगलकामना का पर्व
उत्तर प्रदेश और बिहार से प्रारंभ हुआ यह पर्व आज पूरे भारत में आस्था का प्रतीक बन चुका है। माताएं संतान प्राप्ति, संतान की दीर्घायु और परिवार के कल्याण की कामना से यह कठोर व्रत रखती हैं। श्रद्धा, अनुशासन और तपस्या का यह पर्व भारतीय संस्कृति की गहराई को दर्शाता है।
