

भोपाल। दिवाली के बाद भोपाल और आसपास के जिलों में घरेलू रूप से बनाई गई कार्बाइड गन से गंभीर हादसे लगातार सामने आ रहे हैं। अब तक प्रदेश भर में करीब 300 लोग, जिनमें अधिकतर बच्चे और किशोर हैं, आँखों और चेहरे की चोटों से पीड़ित हुए हैं। अकेले भोपाल में 186 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 15 लोगों की सर्जरी की गई है और 10 की हालत गंभीर बनी हुई है।
राजधानी के हमीदिया और एम्स अस्पताल में भर्ती मरीजों में से कई बच्चों की आँखों की रोशनी चली गई है। डॉक्टरों ने अब तक 10 बच्चों में अम्नियोटिक मेम्ब्रेन प्रत्यारोपण (Amniotic membrane implantation) किया है ताकि उनकी दृष्टि बचाई जा सके।
इस बीच आज शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और बेहतर इलाज के निर्देश दिए। उधर, प्रशासन ने कार्बाइड गन के निर्माण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इस संबंध में अब तक 6 एफआईआर दर्ज की गई हैं और 42 से अधिक गन जब्त की गई हैं।
पुलिस और जिला प्रशासन ने सोशल मीडिया और ऑनलाइन माध्यमों से हो रही इन गनों की बिक्री की जांच शुरू कर दी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, कैल्शियम कार्बाइड और पानी के रासायनिक मिश्रण से बने इस उपकरण से तेज़ विस्फोट और धातु के कण निकलते हैं, जो आँखों के लिए अत्यंत खतरनाक हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों को निर्देश जारी किए हैं कि घायल मरीजों का दीर्घकालिक फॉलोअप रखा जाए। सरकार ने पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा भी की है।
प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि ऐसे घरेलू पटाखों का प्रयोग न करें, क्योंकि यह मज़े के बजाय आजीवन दृष्टिहीनता का कारण बन सकता है।
