
नई दिल्ली, 23 अक्टूबर 2025: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की हवा लगातार दूसरे दिन ‘बेहद खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के नवीनतम डेटा के अनुसार, शहर का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) बुधवार को 363 रिकॉर्ड किया गया, जो इस महीने का सबसे खराब स्तर है। आनंद विहार (421), नेहरू नगर (420) और आरके पुरम (404) सहित छह मॉनिटरिंग स्टेशनों पर तो AQI ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज हुआ है।
मंगलवार रात दीपावली के बाद बुधवार की सुबह दिल्ली धुंध और धुएं की चादर में लिपटी नजर आई। प्रदूषण के स्तर में यह उछाल मुख्य रूप से पटाखों, वाहनों के धुएं और मौसमीय परिस्थितियों के कारण हुआ है। विशेषज्ञों ने कहा कि यह स्थानीय प्रदूषण का परिणाम है। इस बार पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में 96 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे यह स्पष्ट है कि स्थानीय कारकों का प्रभाव अधिक है।
जहां पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने के मामलों में कमी आई है, वहीं उत्तर प्रदेश में इसमें बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2020 के 554 मामलों की तुलना में इस साल 660 घटनाएँ रिपोर्ट हुईं। मथुरा, पीलीभीत और बाराबंकी जैसे जिलों में सबसे ज्यादा आग लगने की घटनाएँ सामने आई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण का धुआँ अब पश्चिम से हटकर पूर्वी दिशा (यूपी की ओर) शिफ्ट हो रहा है।
