लखनऊ 22 अक्टूबर (वार्ता) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच मामले में सहारा समूह को इलाहाबाद उच्च न्यायालय से कानूनी झटका लगा है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने सहारा की चार सहकारी समितियों द्वारा दाखिल याचिका में दखल देने से इन्कार कर खारिज कर दिया है।
याचिका में, ईडी द्वारा धनशोधन निरोधक अधिनियम के तहत सहारा के खिलाफ चल रही जांच की कार्यवाही को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने कहा कि धनशोधन निरोधक अधिनियम(पी एम एल ए) के तहत ई डी की जांच वैध है और इसकी कार्यवाही की जा सकती है।
न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ ने यह फैसला हुमारा इंडिया क्रेडिट कोआपरेटिव सोसाइटी लि., सहारा क्रेडिट कोआपरेटिव सोसाइटी लि., स्टार्स मल्टीपरपोज कोआपरेटिव सोसाइटी लि.एवं सहारा यूनिवर्सल मल्टीपरपोज सोसाइटी लि. द्वारा दाखिल याचिकाओं पर दिया।
सहारा की इन सहकारी समितियों ने, जुलाई 2024 में ई डी द्वारा की गई तलाशी व जब्तीकरण की कार्यवाहियों को चुनौती दी थी। कोर्ट ने ई डी की इस आपत्ति को खारिज कर दिया कि इस मामले लखनऊ पीठ में होने का क्षेत्राधिकार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि समितियों का मुख्यालय लखनऊ में है, वहीं महत्वपूर्ण रिकार्ड जप्त किए गए। ऐसे में यहां अहम आंशिक वादकारण होने की वजह से लखनऊ पीठ को केस की सुनवाई करने का प्राधिकार है।
कोर्ट ने फैसले में कहा कि कानूनी अंतर्निहित शक्तियों के तहत , याचियों के खिलाफ पी एम एल ए के तहत कार्यवाहियों में दखल देने का कोई आधार नहीं है। इसके मद्देनजर, याचिका खारिज की जाती है।
